नई दिल्ली: भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत ने स्पष्ट किया है कि सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे देश के हर नागरिक और जनप्रतिनिधि के लिए समान रूप से खुले हैं। विपक्षी ‘इंडी’ गठबंधन (INDIA Bloc) के नेताओं के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात करने के अनुरोध को अस्वीकार करने के बाद सीजेआई ने यह बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अदालत में मामलों की सुनवाई कानून के मुताबिक की जाती है और विधिसम्मत रूप से जिसके पास अधिकार होगा, उसे राहत जरूर मिलेगी।
🏛️ प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात क्यों नहीं हुई?
मुख्य न्यायाधीश ने बताया कि उन्हें विपक्षी नेताओं की ओर से एक पत्र मिला था, जिसका जवाब उन्होंने रविवार रात को ही दे दिया था।
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पत्र की गोपनीयता: सीजेआई ने कहा कि उन्होंने अपने पत्र में मीटिंग न हो पाने के कारणों को स्पष्ट कर दिया है, लेकिन पत्र की गोपनीयता को बनाए रखते हुए उन्होंने इसके ब्योरे को सार्वजनिक करने से इनकार कर दिया और मीडिया से कहा कि वे इस बारे में विपक्षी नेताओं से ही पूछें।
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हितों का टकराव और प्रशासनिक कारण: जानकारों के अनुसार, ऐसे मामलों में जहां अदालत या न्यायिक प्रक्रिया के प्रभावित होने या हितों के टकराव (Conflict of Interest) की संभावना होती है, न्यायपालिका प्रशासनिक स्तर पर ऐसी बैठकों से दूरी बनाए रखती है ताकि संस्था की निष्पक्षता पर कोई आंच न आए।
⚖️ अदालत का राजनीतिक अखाड़ा बनना नामंजूर
सीजेआई सूर्यकांत ने साफ शब्दों में कहा कि सुप्रीम कोर्ट को किसी भी राजनीतिक अखाड़े में तब्दील नहीं होने दिया जाएगा।
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कानूनी प्रक्रिया का पालन: उन्होंने कहा कि यदि किसी भी आम नागरिक या निर्वाचित जनप्रतिनिधि को कोई शिकायत है, तो वे तय कानूनी प्रावधानों के तहत अदालत में याचिका दायर कर सकते हैं। कोर्ट हर उचित शिकायत को सुनेगा और कानून के अनुसार उचित राहत प्रदान करेगा।
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विरोध प्रदर्शनों पर टिप्पणी: सीजेआई ने यह भी जोड़ा कि देश में तय और निर्धारित स्थानों पर ही नियमों के अनुसार विरोध प्रदर्शन किए जा सकते हैं।
गौरतलब है कि ‘इंडी’ गठबंधन मतदाता सूची के ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) में कथित अनियमितताओं और अन्य मुद्दों को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहा है और इसी सिलसिले में सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकालने की योजना पर काम कर रहा है।
