लखनऊ: समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता, पूर्व मंत्री और उत्तर प्रदेश विधानसभा के पूर्व नेता प्रतिपक्ष राम गोविंद चौधरी का लखनऊ के एसजीपीजीआई (SGPGI) में इलाज के दौरान निधन हो गया। वे 73 वर्ष के थे और पिछले कुछ समय से गंभीर बीमारियों (मधुमेह, उच्च रक्तचाप व किडनी रोग) से जूझ रहे थे। उनके निधन से उत्तर प्रदेश के राजनीतिक हलकों और समर्थकों में शोक की लहर दौड़ गई है।
राजनीतिक दिग्गजों ने दी श्रद्धांजलि
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अखिलेश यादव (सपा प्रमुख): उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर दुख व्यक्त करते हुए लिखा कि समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व नेता प्रतिपक्ष राम गोविंद चौधरी का निधन अत्यंत दुखद है। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें और शोकाकुल परिवार को यह असीम दुख सहने का संबल दे।
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योगी आदित्यनाथ (मुख्यमंत्री, यूपी): सीएम योगी ने कहा कि यूपी विधानसभा के पूर्व नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मंत्री राम गोविंद चौधरी का निधन अत्यंत दुखद है। उन्होंने दिवंगत आत्मा की शांति और शोकाकुल परिजनों को शक्ति देने की प्रार्थना की।
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सतीश महाना (विधानसभा अध्यक्ष): उन्होंने दुख जताते हुए कहा कि उनके निधन से प्रदेश ने एक अनुभवी राजनेता और समर्पित जनप्रतिनिधि खो दिया है।
छात्र राजनीति से शुरू हुआ 8 बार के विधायक का सफर
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शुरुआती जीवन व पढ़ाई: बलिया जिले के गोसाईंपुर गांव में जन्मे राम गोविंद चौधरी ने लखनऊ विश्वविद्यालय से एलएलबी की डिग्री हासिल की और वकालत से करियर की शुरुआत की। वे चंद्रशेखर और लोकनायक जयप्रकाश नारायण के आंदोलनों से जुड़े रहे और आपातकाल के दौरान जेल भी गए।
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चुनावी सफलता: वे 8 बार विधायक चुने गए। 1977 में उन्होंने पहली बार चिलकहर सीट से चुनाव जीता, जिसके बाद वे चिलकहर और बांसडीह विधानसभा क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करते रहे।
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मंत्रिमंडल और संगठन में भूमिका: वे मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव दोनों की सरकारों में मंत्री रहे। उन्होंने बेसिक शिक्षा, समाज कल्याण और पंचायती राज जैसे अहम विभागों की जिम्मेदारी संभाली। 2017 से 2022 तक वे उत्तर प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रहे।
राम गोविंद चौधरी का निधन समाजवादी आंदोलन और उत्तर प्रदेश की राजनीति के लिए एक बड़ी अपूरणीय क्षति माना जा रहा है।
