न्यू न्यूयॉर्क: संयुक्त राष्ट्र (UN) के अगले महासचिव के चुनाव को लेकर अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। मौजूदा महासचिव एंटोनियो गुटेरेस का कार्यकाल 31 दिसंबर को समाप्त हो रहा है और नए प्रमुख 1 जनवरी 2027 से पद संभालेंगे। हालांकि, सुरक्षा परिषद में तीन दौर के गुप्त मतदान के बाद भी अब तक कोई सर्वसम्मत या मजबूत दावेदार सामने नहीं आ सका है।
चुनाव प्रक्रिया और मुख्य चुनौतियां:
अमेरिका और चीन के बीच सहमति की जरूरत: जानकारों का मानना है कि नए यूएन प्रमुख का चुनाव काफी हद तक अमेरिकी राष्ट्रपति और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच होने वाले राजनीतिक समझौते पर निर्भर करेगा। सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्यों (अमेरिका, चीन, रूस, ब्रिटेन और फ्रांस) में से किसी का भी वीटो न होना अनिवार्य है।
अंतिम समय में नए नामों की चर्चा: वर्तमान में दौड़ में शामिल सात मुख्य उम्मीदवारों के अलावा अंतिम समय में कई नए नाम भी सामने आ रहे हैं। इनमें संयुक्त अरब अमीरात की मंत्री लाना नुसेबेह, नीदरलैंड्स की पूर्व यूएन अधिकारी सिग्रिड काग, कजाकिस्तान के राष्ट्रपति कासिम-जोमार्ट तोकायेव और सर्बिया के पूर्व नेता वुक जेरेमिक शामिल हैं।
पहले से शामिल प्रमुख उम्मीदवार: वर्तमान में आईएईए (IAEA) के महानिदेशक राफेल ग्रॉसी, इक्वाडोर की पूर्व विदेश मंत्री मारिया फर्नांडा एस्पिनोसा और कोस्टा रिका की रेबेका ग्रिनस्पैन भी इस दौड़ में बने हुए हैं।
सुरक्षा परिषद और वीटो का प्रभाव
15 सदस्यीय संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में से कम से कम 9 सदस्यों का समर्थन और पांचों स्थायी सदस्यों की सहमति आवश्यक है। वैश्विक तनाव और वीटो पावर रखने वाले देशों के बीच मतभेदों के कारण सहमति बनाना चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है।
