महाराष्ट्र के नांदेड़ में मराठवाड़ा की सूखा स्थिति और फसलों के नुकसान की समीक्षा के लिए आयोजित एक आधिकारिक बैठक के दौरान मंत्रियों, नेताओं और अधिकारियों द्वारा काजू-बादाम खाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। संकट से जूझ रहे किसानों की बैठक में इस तरह ड्राई फ्रूट्स परोसे जाने को लेकर सार्वजनिक आक्रोश और सियासी विवाद खड़ा हो गया है।
वायरल वीडियो पर विवाद: नांदेड़ के जिला नियोजन भवन में मराठवाड़ा के कृषि संकट पर समीक्षा बैठक बुलाई गई थी। बैठक का एक वीडियो सामने आने के बाद विपक्ष ने राज्य सरकार की संवेदनहीनता पर सवाल उठाए।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की प्रतिक्रिया: नागपुर में मीडिया से बात करते हुए सीएम देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि आधिकारिक बैठकों में ड्राई फ्रूट्स परोसना एक मानक प्रशासनिक प्रोटोकॉल है और किसी ने सूखे का मजाक उड़ाने के लिए ऐसा नहीं किया। हालांकि, उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रशासन को जमीनी हकीकत को ध्यान में रखते हुए ज्यादा संवेदनशीलता बरतनी चाहिए और ऐसी परिस्थितियों में इससे बचना चाहिए।
विपक्ष (NCP शरद पवार गुट) का हमला: विधायक रोहित पवार ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जब राज्य में सूखे की गंभीर स्थिति है, तब सरकार असंवेदनशील बनी हुई है और काजू-बादाम खाने में व्यस्त है। उन्होंने सूखे पर चर्चा और किसानों को राहत देने के लिए तुरंत विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की मांग की।
मंत्री संजय शिरसाट का बयान: शिवसेना नेता व मंत्री संजय शिरसाट ने सफाई देते हुए कहा कि ऐसी व्यवस्थाएं अधिकारियों द्वारा की जाती हैं, लेकिन आलोचना जनप्रतिनिधियों को झेलनी पड़ती है। उन्होंने इस संबंध में संभागीय आयुक्त को सख्त निर्देश जारी करने की बात कही।
सरकार द्वारा राहत कदम: सीएम फडणवीस ने बताया कि सूखाग्रस्त क्षेत्रों में एक सप्ताह के भीतर पंचनामा पूरा कर सहायता दी जाएगी। इसके अलावा, कर्ज माफी की प्रक्रिया तेज की जा रही है, पशुधन के लिए चारे और पेयजल का प्रबंध किया जा रहा है और किसानों को फसलों की सिंचाई के लिए अतिरिक्त बिजली दी जा रही है।
