लखनऊ: बहुजन समाज पार्टी (BSP) की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने डिजिटल लेनदेन पर प्रस्तावित नए यूपीआई शुल्कों और यूपी सरकार की स्मार्ट स्कूल योजना को लेकर केंद्र व राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है।
UPI शुल्कों पर सरकार को घेरा
मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर लगातार कई पोस्ट जारी करते हुए 15 अक्टूबर से लागू होने जा रही नई यूपीआई शुल्क व्यवस्था (0.4% MDR) का कड़ा विरोध किया
पूंजीवादी रवैया: उन्होंने कहा कि सरकार ने पहले डिजिटल भुगतान को जमकर बढ़ावा दिया और अब इस पर शुल्क लगाकर “मुनाफाखोरी वाली पूंजीवादी सोच” के तहत जनता से वसूली कर रही है।
आम जनता पर असर: बसपा प्रमुख ने कहा कि इस व्यवस्था को चाहे जो भी नाम दिया जाए, लेकिन इसका अंतिम वित्तीय बोझ आम आदमी की जेब पर ही पड़ेगा, जिससे जनता में नाराजगी और बेचैनी होना स्वाभाविक है।
कल्याणकारी नीतियों की जरूरत: देश में बढ़ती गरीबी और महंगाई का हवाला देते हुए उन्होंने सलाह दी कि सरकार को व्यावसायिक लाभ कमाने के बजाय जनकल्याणकारी नीतियों पर अधिक ध्यान देना चाहिए।
स्मार्ट स्कूल योजना पर उठाए सवाल
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा करीब ₹300 करोड़ की लागत से राज्य के 14,429 परिषदीय विद्यालयों को ‘स्मार्ट स्कूल’ बनाने की घोषणा पर भी मायावती ने प्रतिक्रिया दी:
उन्होंने कहा कि डिजिटल शिक्षा की दिशा में कदम बढ़ाना अच्छी बात है, लेकिन स्मार्ट पढ़ाई से पहले बच्चों के लिए मूलभूत सुविधाएं (जैसे- पक्की छत, बेंच-कुर्सी, किताबें, साफ-सुथरे शौचालय और खेल के मैदान) सुनिश्चित करना कहीं अधिक जरूरी है।
उन्होंने सवाल उठाया कि प्रति स्कूल लगभग ₹2 लाख के बजट में बुनियादी सुविधाओं के साथ-साथ स्मार्ट तकनीक की व्यवस्था किस तरह पूरी होगी, इस पर सरकार को गंभीरता से विचार करना चाहिए।
