वॉशिंगटन/नई दिल्ली: अमेरिकी संसद का निचला सदन ‘हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स’ (House of Representatives) रूस और ईरान पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाने से जुड़े एक अहम विधेयक पर मतदान करने जा रहा है। इस प्रस्तावित कानून के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति को उन देशों पर 100 प्रतिशत तक का आयात शुल्क (Tariff) लगाने का व्यापक अधिकार मिल जाएगा जो रूस से कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस खरीद रहे हैं। इस लक्षित देशों की सूची में भारत का नाम भी प्रमुखता से शामिल है।
विधेयक से जुड़ी मुख्य बातें
विधेयक का नाम: इस कड़े विधेयक को ‘लिंडसे ओ ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट 2026’ नाम दिया गया है।
सीनेट से मिल चुकी है मंजूरी: यह कानून अमेरिकी संसद के उच्च सदन (सीनेट) से भारी बहुमत के साथ पहले ही पास हो चुका है।
हाउस में वोटिंग: निचले सदन में इस पर मतदान होना तय है, और वहां के राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए इसके आसानी से पास होने की उम्मीद जताई जा रही है।
भारत पर क्या पड़ सकता है असर?
विधेयक के तहत रूस से ऊर्जा उत्पाद (तेल और गैस) खरीदने वाले शीर्ष देशों को निशाना बनाया गया है। यदि यह बिल पारित होकर कानून बनता है:
100% अतिरिक्त टैरिफ: भारत सहित 4 प्रमुख देशों पर रूस से तेल आयात जारी रखने के बदले अमेरिकी बाजार में 100% तक अतिरिक्त शुल्क का सामना करना पड़ सकता है।
व्यापारिक व कूटनीतिक तनाव: रियायती दरों पर रूसी कच्चा तेल खरीद रहे भारत जैसे देशों और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंधों में तनाव बढ़ सकता है।
अमेरिका का तर्क है कि रूस के साथ तेल का यह कारोबार मॉस्को को राजस्व प्रदान कर रहा है, जिसका उपयोग यूक्रेन युद्ध में हो रहा है। वहीं, भारत हमेशा से अपने राष्ट्रीय हितों और ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता देने की बात कहता रहा है।
