आगरा: सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट साइबर पुलिस ने आगरा में बड़े पैमाने पर चल रहे एक साइबर फ्रॉड गिरोह का पर्दाफाश किया है। यह गिरोह ‘शादीपार्टनर डॉट कॉम’ (shaadipartner.com) नाम की फर्जी वेबसाइट के जरिए शादी के इच्छुक पुरुषों को अपना शिकार बनाता था।
पुलिस ने इस पूरे फर्जीवाड़े के मास्टरमाइंड वकील अमित कुमार सहित कुल 9 लोगों को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर दर्ज 15,000 रुपये की ठगी की शिकायत के बाद हुई।
2.5 हजार से 15 हजार तक की ठगी का ‘स्मार्ट प्लान’
जांच में सामने आया कि यह गिरोह बहुत ही चालाकी से काम करता था ताकि कोई पुलिस केस न बने:
कम रकम का फ्रॉड: गिरोह एक पीड़ित से 15,000 रुपये से ज्यादा नहीं ऐंठता था, ताकि कोई कानूनी झंझट में न पड़े।
सोशल मीडिया से डेटा: फेसबुक, इंस्टाग्राम और वेबसाइट के माध्यम से शादी के इच्छुक पुरुषों के मोबाइल नंबर जुटाए जाते थे।
फर्जी लड़कियां और कॉन्फ्रेंस कॉल: महिला कॉलर्स व्हाट्सएप पर खूबसूरत लड़कियों की तस्वीरें भेजती थीं। भरोसा जीतने के लिए गिरोह की दूसरी महिला स्टाफ फर्जी दुल्हन बनकर कॉन्फ्रेंस कॉल पर बात भी करती थी।
कई बहानों से वसूली: रजिस्ट्रेशन, प्रोफाइल एक्टिवेशन और कांटेक्ट नंबर अनलॉक करने के नाम पर 2,500 से 15,000 रुपये तक वसूले जाते थे। पैसे मिलने के कुछ दिन बाद ‘मांगलिक दोष’ या ‘परिवार की असहमति’ का बहाना बनाकर रिश्ता तोड़ दिया जाता था।
वकील मास्टरमाइंड ने रचा था कानूनी ढाल का ड्रामा
गिरोह का सरगना 29 वर्षीय अमित कुमार (BA LLB) था। उसने अपनी कानूनी समझ का इस्तेमाल कर पुलिस से बचने के लिए एक मजबूत ताना-बाना बुना था:
उसने अपनी महिला मैनेजर जया शाक्य (उर्फ शशि) के नाम पर ‘मेसर्स शादी पार्टनर’ नाम की प्रोपराइटरशिप फर्म बनाई।
बैंक खाते, सिम कार्ड और कानूनी रजिस्ट्रेशन (MSME व श्रम विभाग) सभी मैनेजर के नाम पर थे।
खुद को कागजों में सिर्फ ‘लीगल एडवाइजर’ दिखाता था।
जब पुलिस ने 4 सितंबर को सिकंदरा स्थित रामाजी धाम अपार्टमेंट में चल रहे अवैध कॉल सेंटर पर छापा मारा, तो जया शाक्य और 8 महिला टेलीकॉलर्स पकड़ी गईं। अमित कुमार अपना फोन बंद कर फरार हो गया था, जिसे 8 सितंबर को आगरा के काला कुंज इलाके से एक काली कार (जिस पर ‘एडवोकेट’ का स्टिकर लगा था) से गिरफ्तार किया गया।
नौकरी ऐप से भर्ती और टारगेट बेस कमीशन
कॉल सेंटर में काम करने वाली महिलाओं की भर्ती ‘WorkIndia’ और ‘Apna’ जैसे जॉब ऐप्स के जरिए की जाती थी। इन्हें 6,000 से 7,000 रुपये की फिक्स्ड सैलरी के अलावा ठगी की रकम पर 10% कमीशन दिया जाता था। हर कॉलर को महीने में कम से कम 15,000 रुपये ऐंठने का टारगेट मिलता था।
बरामदगी
पुलिस टीम (सब इंस्पेक्टर गौरव सिंह, हेड कांस्टेबल भरत और कांस्टेबल धर्मेंद्र) ने इस छापेमारी के दौरान निम्नलिखित सामान बरामद किया:
1 काली कार
₹50,000 नकद
7 डेस्कटॉप सीपीयू (CPU)
47 मोबाइल फोन
पुलिस के अनुसार, देश भर में हजारों लोग इस गिरोह का शिकार बन चुके हैं, जिनमें से कई लोगों को तो ठगे जाने का अहसास भी नहीं हुआ है।
