नई दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट ने छह नीट-यूजी अभ्यर्थियों की उस याचिका पर सुनवाई की, जिसमें आरोप लगाया गया था कि उन्होंने अपनी ओएमआर शीट में जो उत्तर भरे थे, वे राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) द्वारा अपलोड की गई ओएमआर शीट से मेल नहीं खाते हैं। जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ के समक्ष याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकील ने कहा कि छह छात्र दोबारा आयोजित नीट परीक्षा में शामिल हुए थे और उनकी शिकायत अन्य मामलों से अलग है। वकील ने अदालत से कहा, “हमारी मांग केवल इतनी है कि हमें मूल ओएमआर शीट की प्रतियां उपलब्ध कराई जाएं, ताकि हम अपने अंकों का सत्यापन कर सकें। काउंसलिंग प्रक्रिया पहले से जारी है और हम सीमित मुद्दे को लेकर अदालत आए हैं।”
इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नीट और एनटीए से जुड़ी इसी तरह की कई शिकायतें पहले से लंबित हैं और अदालत फिलहाल एनटीए के संस्थागत सुधारों से जुड़े मुद्दों पर विचार कर रही है, हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को राहत देने से इनकार करते हुए उन्हें दिल्ली हाई कोर्ट जाने को कहा और याचिका खारिज कर दी।
इसके पहले 4 अगस्त को नीट-यूजी पेपर लीक विवाद के बाद केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर बताया था कि परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए कई बड़े कदम उठाए गए हैं। 2026 में लागू नए कानून के तहत अब पेपर लीक और नकल जैसे अपराधों पर कड़ी सजा का प्रावधान किया गया है।
हलफनामे में केंद्र ने कहा कि नए कानून के तहत परीक्षा में पेपर लीक, नकल या किसी भी तरह की धांधली करने वालों को 10 साल तक की जेल और 5 करोड़ रुपए तक का जुर्माना हो सकता है। सरकार का मकसद भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर पूरी तरह रोक लगाना है।
सिस्टम में सुधार के लिए सरकार ने इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय टास्क फोर्स भी गठित की है। यह समिति मौजूदा परीक्षा प्रणाली की खामियों की समीक्षा करेगी और उसे और सुरक्षित बनाने के लिए सुझाव देगी। केंद्र ने शीर्ष अदालत को बताया कि यह टास्क फोर्स तीन महीने में अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। रिपोर्ट के आधार पर ही आगे के बड़े बदलाव किए जाएंगे।
