नई दिल्ली : जंतर-मंतर छात्र प्रदर्शन के दौरान मेटैलिक पैलेट गन के कथित इस्तेमाल को लेकर दायर याचिकाओं पर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट ने दिल्ली पुलिस और केंद्र सरकार से तल्ख सवाल पूछे।
‘SOP में मेटैलिक पैलेट का जिक्र नहीं’
याचिकाकर्ता यशोवर्धन आजाद की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता वृंदा ग्रोवर ने दलील दी कि घायल छात्रों के शरीर से मेटैलिक पेलेट निकाले गए। जबकि दिल्ली पुलिस की SOP में सिर्फ रबर बुलेट और प्लास्टिक पैलेट जैसे कम घातक विकल्पों का जिक्र है। उनका कहना था कि बल प्रयोग की तय प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।
कोर्ट के 3 बड़े निर्देश
दिल्ली पुलिस को निर्देश: जस्टिस जे. बागची और CJI की बेंच ने दिल्ली पुलिस से कहा कि ‘ग्रेडेड रिस्पॉन्स’ से जुड़े स्टैंडिंग ऑर्डर रिकॉर्ड पर पेश किए जाएं। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि मौजूदा स्टैंडिंग ऑर्डर मेटैलिक पैलेट गन के इस्तेमाल की इजाजत नहीं देते।
घायल छात्रों के इलाज के आदेश: कोर्ट ने लेडी हार्डिंग अस्पताल को निर्देश दिया कि पैलेट लगने से घायल याचिकाकर्ता के साथ-साथ उसी प्रदर्शन में घायल हुए अन्य सभी लोगों को भी आवश्यक और उचित मेडिकल सुविधा मुहैया कराई जाए।
रिकॉर्ड सुरक्षित रखने का आदेश: केंद्र सरकार ने अदालत को भरोसा दिलाया कि जांच के लिए जरूरी मेडिकल रिकॉर्ड और दस्तावेज सुरक्षित रखे जाएंगे। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को याचिका में संशोधन की अनुमति भी दी।
‘ग्रेड रिस्पॉन्स’ की वैधता पर होगी सुनवाई
बेंच ने कहा कि कानून के तहत ‘ग्रेड रिस्पॉन्स’ यानी परिस्थितियों के मुताबिक चरणबद्ध बल प्रयोग का प्रावधान है। अगर याचिकाकर्ता पूरी नीति को चुनौती देना चाहते हैं तो वे याचिका में संशोधन कर सकते हैं। इसी व्यवस्था की वैधता पर आगे सुनवाई होगी।
आगे क्या
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई जारी रखने का फैसला किया है। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि NEET पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर अत्यधिक बल का इस्तेमाल हुआ।
कोर्ट के इस रुख के बाद दिल्ली पुलिस को अब अपनी बल प्रयोग नीति और SOP को लेकर सफाई देनी होगी।
