नई दिल्ली : बलूचिस्तान के जियारत में BLA के हमले में मारे गए पाकिस्तानी पुलिसकर्मियों की संख्या 42 पहुंच गई है। शुरुआती आंकड़ा 9 था, लेकिन अगवा किए गए जवानों के शव मिलने के बाद मौतों का आंकड़ा बढ़ा। सबसे ज्यादा चर्चा शवों को लेकर हो रहे बर्ताव की है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में 10 पुलिसकर्मियों के ताबूत खुले टेम्पो में लादकर बिना किसी औपचारिकता के ले जाए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों ने इसे “ताबूतों का जुलूस” कहा और पाकिस्तानी सेना-ISI की नीतियों को जिम्मेदार ठहराया।
जियारत हमला: 42 पुलिसकर्मी मारे गए, 54 BLA विद्रोही ढेर
कहां हुआ: बलूचिस्तान के जियारत जिले के मंगी फेज-III में पुलिस चौकी।
हमला कैसे: सोमवार देर रात दर्जनों BLA हमलावरों ने चौकी घेर ली। घंटों मुठभेड़ के बाद 9 पुलिसकर्मी मौके पर मारे गए, कई घायल। कुछ जवान अगवा हुए।
सेना का जवाब: पाकिस्तान के सर्च-ऑपरेशन में 54 विद्रोही मारे गए। बाद में अगवा पुलिसकर्मियों की बॉडी भी मिली, जिससे कुल मौत 42 हुई।
पाकिस्तान का आरोप: सरकार ने BLA को जिम्मेदार ठहराया और “बाहरी समर्थन” की बात कही, पर कोई सार्वजनिक सबूत नहीं दिया।
भौगोलिक संदर्भ
‘सनोबर का शहर’ बना ‘ताबूतों का शहर’
हमले के बाद का सबसे दर्दनाक पहलू शवों की विदाई रहा।
वायरल वीडियो: एक खुले टेम्पो में 10 ताबूत लदे हैं। कोई सैन्य सम्मान, कोई औपचारिकता नहीं। वीडियो एक स्थानीय ने X पर पोस्ट किया।
स्थानीय का पोस्ट: “कभी ‘सनोबर का शहर’ कहलाने वाला जियारत आज ताबूतों का गवाह है। ये पुराने सनोबर पेड़ एक और त्रासदी देख रहे हैं।”
आरोप: पोस्ट में लिखा, “सेना और ISI की विनाशकारी नीतियों ने जूनिपर के शहर को ताबूतों के शहर में बदल दिया। हर ताबूत के साथ टूटा परिवार, मां के आंसू, विधवा का दुख है।”
पैटर्न: हमेशा की तरह पाकिस्तान ने हमले का ठीकरा सीमा पार ताकतों पर फोड़ा।
