मदर ऑफ ऑल डील : भारत और यूरोपीय संघ के बीच होने जा रहा ऐतिहासिक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट,कुछ ही देर में होगा ऐलान

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नई दिल्ली। यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो लुइस सैंटोस दा कोस्टा और यूरोपीय आयोग के अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने दिल्ली के हैदराबाद हाउस में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार को राष्ट्रीय राजधानी में 16वें भारत-यूरोपीय संघ (ईयू) शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेंगे, जिसमें यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा भारत और ईयू के बीच अब तक के सबसे बड़े व्यापार समझौते की घोषणा करेंगे, जिसे ‘सभी समझौतों की जननी’ कहा जा रहा है। पिछले कुछ वर्षों में भारत और ईयू के रिश्तों में सकारात्मक तेजी देखी गई है। इसी माहौल में यह शिखर सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। इस समझौते का एक बड़ा असर ऑटोमोबाइल सेक्टर पर पड़ेगा। इसके तहत यूरोप की कार कंपनियों के लिए भारतीय बाजार खोला जाएगा। अभी यूरोपीय कारों पर 110 प्रतिशत आयात शुल्क लगता है, जिसे घटाकर करीब 40 प्रतिशत किया जा सकता है। इससे फॉक्सवैगन, मर्सिडीज-बेंज और बीएमडब्ल्यू जैसी कंपनियों की कारें भारत में सस्ती हो सकती हैं।फिलहाल, भारत में हर साल बिकने वाली 44 लाख कारों में से यूरोपीय कंपनियों की हिस्सेदारी केवल 4 प्रतिशत है।यूरोपीय संघ पहले से ही भारत का एक बड़ा व्यापारिक साझेदार है। भारत के कुल निर्यात में ईयू की हिस्सेदारी करीब 17 प्रतिशत है, जबकि ईयू के कुल विदेशी निर्यात में भारत की हिस्सेदारी लगभग 9 प्रतिशत है।वित्त वर्ष 2024-25 में भारत और ईयू के बीच वस्तुओं का कुल व्यापार 136.53 अरब डॉलर रहा। इसमें भारत का निर्यात 75.85 अरब डॉलर और आयात 60.68 अरब डॉलर रहा। इस तरह ईयू भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बन गया।इसके अलावा, सेवाओं का व्यापार भी दोनों के बीच 2024 में 83.10 अरब डॉलर तक पहुंच गया।

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