ढाका: अमेरिका ने जैसे ही भारत के ऊपर से टैरिफ घटाकर 18 फीसदी किए हैं, वैसे ही पड़ोसियों में हड़कंप मच गया है. बांग्लादेश भी उनमें से एक है और मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस दौड़े-दौड़े अमेरिका पहुंचे हैं. बांग्लादेश और अमेरिका के बीच 9 फरवरी को एक अहम व्यापार समझौता होने जा रहा है. खास बात यह है कि यह डील आम चुनाव से महज 72 घंटे पहले साइन की जाएगी. यही टाइमिंग इस समझौते को विवादों के घेरे में ले आई है. सवाल उठ रहे हैं कि इतनी बड़ी आर्थिक डील को चुनाव के बाद क्यों नहीं टाला गया.
भारत की डील से क्यों बेचैन हुआ बांग्लादेश?
इस डील में तेजी का कारण सीधे भारत से जुड़ा है. हाल ही में भारत और अमेरिका के बीच हुई ट्रेड डील में भारतीय सामानों पर टैरिफ घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया. इससे बांग्लादेश में चिंता बढ़ गई, क्योंकि वह भी अमेरिका को लगभग वही उत्पाद बेचता है जो भारत, खासतौर पर रेडीमेड गारमेंट. बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था अमेरिका पर काफी हद तक निर्भर है. अमेरिका को हर साल 7 से 8 अरब डॉलर के कपड़े और टेक्सटाइल निर्यात किए जाते हैं. यह अमेरिका को होने वाले बांग्लादेश के कुल निर्यात का करीब 90 प्रतिशत है. अगर भारत को कम टैरिफ मिलता है और बांग्लादेश पीछे रह जाता है, तो अमेरिकी खरीदार ऑर्डर भारत की ओर मोड़ सकते हैं. इसका सीधा असर बांग्लादेश में लाखों नौकरियों पर पड़ेगा. यही वजह है कि बांग्लादेश इस डील को जल्द से जल्द साइन करना चाहता है.
बांग्लादेश ने अमेरिका से की सीक्रेट डील?
अप्रैल 2025 में अमेरिका ने बांग्लादेश पर 37 प्रतिशत टैरिफ लगा दिया था. बाद में इसे घटाकर 35 और फिर 20 प्रतिशत किया गया. अब उम्मीद जताई जा रही है कि नई डील के तहत टैरिफ 15 प्रतिशत तक लाया जा सकता है. लेकिन राहत की इस उम्मीद के साथ सबसे बड़ा सवाल पारदर्शिता का है. साल 2025 के मध्य में बांग्लादेश की अंतरिम सरकार, जिसकी अगुवाई मोहम्मद यूनुस कर रहे हैं, ने अमेरिका के साथ एक गोपनीयता समझौते पर हस्ताक्षर किए. इसके तहत ट्रेड और टैरिफ से जुड़ी बातचीत को सार्वजनिक न करने की शर्त रखी गई.
बांग्लादेश को गुलाम बनाने वाली डील होगी?
नतीजा यह है कि न संसद, न उद्योग जगत और न ही आम जनता को इस डील की शर्तों की जानकारी है. विशेषज्ञों का कहना है कि इतनी बड़ी आर्थिक डील पर खुली बहस जरूरी थी. सेंटर फॉर पॉलिसी डायलॉग से जुड़े विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव से पहले डील साइन करना आने वाली सरकार के हाथ बांध सकता है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका की शर्तें आसान नहीं हैं. बांग्लादेश को चीन से आयात घटाने, अमेरिका से सैन्य और अन्य खरीद बढ़ाने और अमेरिकी उत्पादों को बिना ज्यादा जांच के बाजार में प्रवेश देने की बात कही जा रही है.
सबसे ज्यादा चिंता गारमेंट सेक्टर को लेकर है. यह उद्योग 40 से 50 लाख लोगों को रोजगार देता है और देश की कुल निर्यात कमाई का 80 प्रतिशत से ज्यादा यहीं से आता है. बांग्लादेश गार्मेंट मैन्युफैक्चरर एंड एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के प्रतिनिधियों का कहना है कि उन्हें नहीं पता कि इस डील में किस सेक्टर पर क्या असर पड़ेगा.
