लखनऊ : उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी जीरो टॉलरेंस नीति को सख्ती से लागू करते हुए बड़ा कदम उठाया है. मानव संपदा पोर्टल पर अपनी चल-अचल संपत्ति का ब्योरा अपलोड न करने वाले 68,236 राज्यकर्मियों का जनवरी माह का वेतन रोक दिया गया है. अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जब तक ये कर्मचारी पोर्टल पर अपनी संपत्ति का पूरा विवरण ऑनलाइन दर्ज नहीं कर देंगे, तब तक उनका वेतन जारी नहीं किया जाएगा.
मुख्य सचिव एसपी गोयल के निर्देश पर सभी राज्यकर्मियों को 31 जनवरी 2026 तक अपनी चल और अचल संपत्ति (31 दिसंबर 2025 तक अर्जित) का ब्योरा मानव संपदा पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य था. प्रदेश में कुल 8,66,261 राज्यकर्मियों को यह विवरण जमा करना था, लेकिन तय समयसीमा बीत जाने के बाद भी बड़ी संख्या में कर्मचारियों ने निर्देशों की अनदेखी की. इस लापरवाही के चलते शासन ने वेतन रोकने का सख्त फैसला लिया.
सबसे ज्यादा तृतीय श्रेणी के कर्मचारी
सबसे अधिक प्रभावित तृतीय श्रेणी (ग्रुप सी) के कर्मचारी हुए हैं, जिनमें से 34,926 ने संपत्ति का ब्योरा नहीं दिया. इसके अलावा चतुर्थ श्रेणी (ग्रुप डी) के 22,624, द्वितीय श्रेणी (ग्रुप बी) के 7,204 और प्रथम श्रेणी (ग्रुप ए) के 2,628 अधिकारी शामिल हैं. इन सभी को अब फरवरी में जनवरी का वेतन नहीं मिलेगा, जब तक वे पोर्टल पर विवरण अपलोड नहीं कर देते. सरकार का यह कदम पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है. अधिकारियों का कहना है कि संपत्ति विवरण जमा करना सरकारी कर्मचारी आचरण नियमावली के तहत अनिवार्य है और इसका उल्लंघन गंभीर माना जाएगा. यदि कर्मचारी जल्द कार्रवाई नहीं करते, तो उनके खिलाफ विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई भी हो सकती है, जिसमें पदोन्नति रोकना या अन्य दंड शामिल हो सकते हैं.
भ्रष्टाचार पर लगाम की तैयारी
मानव संपदा पोर्टल उत्तर प्रदेश सरकार का एकीकृत मानव संसाधन प्रबंधन सिस्टम है, जिसके माध्यम से कर्मचारियों की सेवा संबंधी जानकारी, वेतन, संपत्ति विवरण आदि का डिजिटल प्रबंधन किया जाता है. यह कदम भ्रष्टाचार पर लगाम कसने और प्रशासनिक अनुशासन मजबूत करने की योगी सरकार की मुहिम का हिस्सा है. अधिकारियों ने सभी प्रभावित कर्मचारियों से अपील की है कि वे तुरंत पोर्टल पर लॉगिन कर अपनी संपत्ति का ब्योरा अपडेट करें, ताकि उनका वेतन जल्द जारी हो सके
