नई दिल्ली : अमेरिका की राजधानी वाशिंगटन डीसी को डोनाल्ड ट्रंप ने छावनी में बदल कर रख दिया है. नेशनल गार्ड्स की तैनाती के बाद अब लोग नाराज हैं. बुधवार को शहर के एक व्यस्त इलाके 14वीं स्ट्रीट नॉर्थवेस्ट में लोग सड़कों पर उतर आए. लोग राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की उस घोषणा के बाद सड़कों पर आए, जिसमें उन्होंने कहा कि उनकी सरकार अब शहर की पुलिस को अपने कब्जे में लेगी और नेशनल गार्ड की तैनाती बढ़ाएगी.
ट्रंप का कहना है कि देश की राजधानी में अपराध की स्थिति ‘आपातकाल’ जैसी है. वहीं स्थानीय नेताओं ने आंकड़ों की ओर इशारा करते हुए कहा कि वर्तमान में अपराध के मामले 30 साल के निचले स्तर पर है. प्रदर्शनकारी लोग पुलिस की संख्या बढ़ने से नाराज हैं. पुलिस ने जब 14वीं स्ट्रीट पर वाहन चेकपॉइंट लगाया, तो लोगों ने नारेबाजी शुरू कर दी. ‘फासिस्ट, घर जाओ!’ जैसे नारे गूंजे.
कुछ प्रदर्शनकारियों ने ड्राइवरों से चेकपॉइंट की ओर न जाने की अपील की. शहर के मेयर, जो डेमोक्रेट हैं, इस कदम को ‘तानाशाही’ बता चुके हैं, लेकिन बाद में उन्होंने इसे ‘सुरक्षा बढ़ाने’ का कदम भी बताया. उधर, ट्रंप का दावा है कि ये सब शहर को ‘अपराधियों और ठगों’ से बचाने के लिए है.
43 लोगों को किया गया गिरफ्तार
मंगलवार रात को 1,450 स्थानीय और फेडरल अधिकारियों ने मिलकर 43 लोगों को गिरफ्तार किया. इनमें ज्यादातर ट्रैफिक उल्लंघन या छोटे-मोटे मामले थे. डीसी काउंसिल की सदस्य क्रिस्टीना हेंडरसन ने इसे ‘साधारण शनिवार की रात’ जैसा बताया और ट्रंप के इस कदम को ‘नाटक’ करार दिया.
बुधवार को होमलैंड सिक्योरिटी, ड्रग इन्फोर्समेंट एडमिनिस्ट्रेशन (DEA) और FBI के एजेंट्स शहर के अलग-अलग इलाकों में दिखे. नेशनल गार्ड के जवान भी तैयार हैं और गुरुवार से उनकी तैनाती और बढ़ने वाली है.
वाशिंगटन डीसी पर कंट्रोल कर सकते हैं ट्रंप
अमेरिका के दूसरे राज्यों और शहरों के विपरीत ट्रंप वाशिंगटन पुलिस को 30 दिनों तक अपने कंट्रोल में ले सकते हैं. अगर वह लंबे समय तक वाशिंगटन पर कंट्रोल चाहते हैं तो इसके लिए कांग्रेस के मंजूरी की जरूरत पड़ेगी. ट्रंप का प्लान सिर्फ पुलिसिंग तक सीमित नहीं है.
उन्होंने बेघर लोगों के कैंप हटाने का भी ऐलान किया है. यूएस पार्क पुलिस ने मार्च से अब तक दर्जनों टेंट हटा दिए हैं और इस हफ्ते दो और कैंप हटाने की तैयारी है. बेघर लोगों को शेल्टर में जाने या नशा-मुक्ति का विकल्प दिया जा रहा है, लेकिन मना करने वालों पर जुर्माना या जेल की तलवार लटक रही है.