विवेकानन्द पॉलीक्लीनिक एवं आयुर्विज्ञान संस्थान, लखनऊ ने विशेषीकृत स्ट्रोक प्रबंधन टीम की घोषणा की।

उत्तर प्रदेश राज्य लखनऊ शहर

चूँंकि स्ट्रोक विश्व स्तर पर मृत्यु के प्रमुख कारणों में से एक तथा विकलांगता (मॉर्बिडिटी) का तीसरा प्रमुख कारण है। इस गंभीर स्थिति को ध्यान में रखते हुए विवेकानन्द पॉलीक्लीनिक एवं आयुर्विज्ञान संस्थान, लखनऊ जो 500 बिस्तरों वाला एक सुपर-स्पेशियलिटी चिकित्सा संस्थान है, इस सप्ताह संस्थान के 57वें समर्पण दिवस के अवसर पर “गोल्डन आवर” (स्वर्णिम समय) के भीतर जीवनरक्षक उपचार प्रदान करने हेतु एक समर्पित, बहु-विषयक स्ट्रोक तत्परता टीम (Stroke Readiness Team) के गठन की घोषणा की है।

भारत सहित विकासशील देशों में स्ट्रोक की घटनाओं में तेजी से वृद्धि हो रही है। इस्कीमिक स्ट्रोक (रक्त के थक्के के कारण) हेमरेजिक स्ट्रोक (मस्तिष्क में रक्तस्राव) की तुलना में अधिक सामान्य है, किंतु दोनों ही स्थितियों में समय पर उपचार ही जीवन रक्षा और बेहतर स्वास्थ्य लाभ की कुंजी है।

 

*4 से 5 घंटे की महत्वपूर्ण समय-सीमा*

विवेकानन्द पॉलीक्लीनिक एवं आयुर्विज्ञान संस्थान, लखनऊ के विशेषज्ञों ने बताया कि इस्कीमिक स्ट्रोक के मामलों में इंट्रावीनस (IV) थ्रोम्बोलाइसिस-जो थक्के को घोलने वाला उपचार है – अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्य एवं अनुशंसित उपचार पद्धति है। परंतु यह उपचार केवल लक्षण शुरू होने के 4 से 5 घंटे की अवधि के भीतर ही प्रभावी रहता है।

 

*विवेकानन्द पॉलीक्लीनिक एवं आयुर्विज्ञान संस्थान, लखनऊ के प्रसिद्ध न्यूरोलॉजिस्ट प्रोफेसर यू.के. मिश्रा ने कहा कि*, “वर्तमान में, दुनिया भर में केवल 2 से 5 प्रतिशत स्ट्रोक मरीज ही इस महत्वपूर्ण समय-सीमा के भीतर ही अस्पताल पहुँच पाते हैं।’’

उन्होंने आगे कहा, “हमारा उद्देश्य इस आंकड़े को बदलना है। हमने अपने संस्थान में पूर्व में भी सफलतापूर्वक IV थ्रोम्बोलाइसिस के माध्यम से स्ट्रोक के मरीजों का सफल उपचार किया है, और हमारी उन्नत सुविधाएँ 24×7 इन स्ट्रोक आपात स्थितियों को संभालने के लिए पूर्णतः सक्षम हैं।”

 

*समग्र एवं बहु-विषयक देखभाल*

संस्थान की स्ट्रोक टीम में निम्नलिखित विशेषज्ञ शामिल हैंः

ऽ न्यूरोलॉजिस्ट

ऽ न्यूरोसर्जन

ऽ रेडियोलॉजिस्ट

ऽ इंटेंसिविस्ट

ऽ इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर

ऽ प्रशिक्षित नर्स एवं पैरामेडिकल स्टाफ

यह समन्वित व्यवस्था सुनिश्चित करती है कि जैसे ही मरीज इमरजेंसी विभाग में पहुँचता है, उसे तुरंत आवश्यक न्यूरो-इमेजिंग और शीघ्र उपचार प्रदान किया जाता है।

 

*लक्षणों की पहचान करें*

संस्थान आम जनता से आग्रह करता है कि यदि निम्न में से कोई भी लक्षण अचानक दिखाई दे, तो तुरंत आपात चिकित्सा सहायता लेंः

ऽ हाथ या पैर में कमजोरी’’ – विशेषकर शरीर के एक तरफ

ऽ चेहरे का टेढ़ा होना या कमजोरी’’

ऽ बोलने में कठिनाई’’ – अस्पष्ट या लड़खड़ाती आवाज

इनमें से कोई भी लक्षण अकेले या एक साथ दिखाई देने पर मरीज को तुरंत विवेकानन्द पॉलीक्लिनिक के आपात विभाग में पहुँंचाना चाहिए, ताकि सर्वोत्तम उपचार सुनिश्चित किए जा सकें और दीर्घकालिक विकलांगता के जोखिम को कम किया जा सके।

 

*संस्थान के सचिव, स्वामी मुक्तिनाथानन्द ने कहा कि* “हम स्वामी विवेकानन्द के उस स्पष्ट आह्वान के अनुरूप अपनी चिकित्सा सेवाओं को सभी तक पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं, जिसमें उन्होंने रोगियों की सेवा को साक्षात ईश्वर की सेवा बताया है।”

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