ईरान में हिंसा, 7 की मौत, ईरानी राष्ट्रपति बोले-ने कही ऐसी बात कि मच गया बवाल

विदेश

नई दिल्ली : ईरान की कमजोर होती अर्थव्यवस्था से भड़के विरोध प्रदर्शन गुरुवार को देश के ग्रामीण प्रांतों तक पहुंच गए. अधिकारियों के मुताबिक, इन प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षाबलों और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई हिंसा में कम से कम सात लोगों की मौत हो गई. यह पहली बार है जब मौजूदा आंदोलन में मौतों की पुष्टि हुई है.

ईरान में हो रहे ये प्रदर्शन 2022 के बाद ईरान में सबसे बड़े माने जा रहे हैं. उस साल 22 वर्षीय महसा अमीनी की पुलिस हिरासत में मौत के बाद देशभर में बड़े पैमाने पर आंदोलन हुआ था. हालांकि, मौजूदा विरोध अब तक पूरे देश में एकसाथ नहीं फैला है और न ही यह महसा अमीनी के मामले जितना बड़ा है. अमीनी को हिजाब सही तरीके से न पहनने के आरोप में हिरासत में लिया गया था.

हालिया आंदोलन में सबसे गंभीर हिंसा ईरान के लोरेस्तान प्रांत के अजना शहर में देखने को मिली, जो तेहरान से करीब 300 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में स्थित है. सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में सड़कों पर जलती हुई वस्तुएं, गोलियों की आवाजें और ‘शर्म करो, शर्म करो’, ‘मुल्लाओं देश छोड़ो’ के नारे सुनाई दे रहे हैं.

ईरान में क्यों शुरू हुए विरोध प्रदर्शन?
ईरान के हालिया आंदोलन की वजह देश की मुद्रा ईरानी रियाल में भारी गिरावट है जिससे महंगाई बेतहाशा बढ़ गई है. देश के सुधारवादी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान की अगुवाई वाली असैन्य सरकार प्रदर्शनकारियों से बातचीत की कोशिश कर रही है.

हालांकि, राष्ट्रपति ने यह भी स्वीकार किया है कि रियाल के तेजी से अवमूल्यन के चलते उनके पास हालात सुधारने के लिए बहुत सीमित विकल्प हैं. फिलहाल एक अमेरिकी डॉलर की कीमत करीब 14 लाख रियाल तक पहुंच चुकी है.

‘हमारा अंजाम नरक होगा…’
इस बीच पेजेश्कियान का एक वीडियो सामने आया है जिसमें वो देश में चल रहे आंदोलन के लिए अपनी सरकार को जिम्मदार बता रहे हैं. वो कह रहे हैं कि अगर सरकारी अधिकारी लोगों की समस्याओं को नहीं सुलझाते तो अल्लाह उन्हें जहन्नुम में भेजेगा.

पेजेश्कियान के हवाले से ‘द जेरूसलम पोस्ट’ ने लिखा, ‘कुरान के अनुसार, अगर हम लोगों की दिक्कतें दूर नहीं कर पाए तो हमारा अंजाम नरक होगा, अल्लाह हमें जहन्नुम में भेजेंगे.’

उन्होंने आगे कहा, ‘इसलिए हमें हर संभव तरीके से, चाहे एक व्यक्ति के रूप में, एक सामाजिक समूह के रूप में, पूंजीपति के रूप में या सरकार के तौर पर, लोगों की समस्याओं की गांठें खोलने की कोशिश करनी चाहिए.’

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *