लखनऊ : इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने सीतापुर जनपद में चल रहे स्कूल मर्जर की प्रक्रिया पर फिलहाल रोक लगा दी है. मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली बेंच ने स्पष्ट कहा है कि जब तक याचिका पर अंतिम निर्णय नहीं हो जाता, तब तक जिले में किसी भी सरकारी स्कूल का मर्जर नहीं किया जाएगा. कोर्ट ने आदेश देते हुए यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया है.
स्कूल मर्जर पर लगी रोक
यह आदेश सीतापुर जिले में प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों को एकीकृत (मर्ज) किए जाने के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया. याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकील एल.पी. मिश्रा, गौरव मेहरोत्रा और उत्सव मिश्रा ने कोर्ट में अपनी बात रखी.
उन्होंने बताया कि मर्जर की प्रक्रिया में राज्य सरकार द्वारा प्रस्तुत डाटा में कई विसंगतियां हैं, जिससे स्कूलों की स्वायत्तता और छात्रों के अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है. सरकार की ओर से पेश दलीलों को सुनने के बाद कोर्ट ने माना कि सरकार की कार्रवाई में पारदर्शिता की कमी दिखाई देती है. डाटा की खामियों और प्रक्रिया की अस्पष्टता को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने आदेश दिया कि अगली सुनवाई तक कोई नया मर्जर नहीं होगा.
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यह आदेश फिलहाल सिर्फ सीतापुर जनपद पर लागू होगा. अन्य जिलों के मामलों पर अलग से विचार किया जाएगा. इस मामले की अगली सुनवाई की तारीख निर्धारित की जानी बाकी है.
क्या है स्कूल मर्जर योजना
सरकार की योजना थी कि छात्र संख्या और संसाधनों के आधार पर दो या अधिक स्कूलों को एकीकृत किया जाए, जिससे शिक्षण व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाया जा सके. लेकिन इस प्रक्रिया का विरोध स्थानीय स्तर पर अभिभावकों और सामाजिक संगठनों द्वारा लगातार किया जा रहा था.
अखिलेश यादव ने बीजेपी को दी चेतावनी
इसको लेकर समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने राज्य सरकार पर निशाना साधा है. इसको लेकर अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, ‘अगर शिक्षा का महत्व न समझनेवाले भाजपाइयों ने हाईकोर्ट के आदेश के ख़िलाफ़ जाकर अपनी बुलडोज़री मनमर्जी चलाई और स्कूल का मर्जर किया तो हम हर उस गांव में ‘पीडीए पाठशाला’ खोल देंगे जहां बच्चों से पढ़ाई का बुनियादी हक़ छीना जा रहा है. ये पीडीए समाज के ख़िलाफ़ एक बड़ी भाजपाई साज़िश है. भाजपा और उनके संगी-साथी हर जगह अपने कार्यालय तो खोल रहे हैं लेकिन स्कूल बंद कर रहे हैं. भाजपा जाए तो शिक्षा आए.’