नई दिल्ली : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जबसे सत्ता में आए हैं, तब से वह कई मौकों पर तानाशाह की तरह व्यवहार करते हैं. अब ट्रंप ने खुद को तानाशाह ही कह डाला है. ग्लोबल इकोनॉमिक फोरम के मंच से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऐसा बयान दे दिया, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया. स्विट्जरलैंड के दावोस में बोलते हुए ट्रंप ने खुद को ‘तानाशाह’ कह दिया. हालांकि उन्होंने तुरंत यह भी जोड़ दिया कि हर हाल में नहीं, लेकिन कभी-कभी तानाशाह होना जरूरी हो जाता है.
ट्रंप ने खुद को क्यों कहा तानाशाह?
ट्रंप अपने भाषण की प्रतिक्रिया पर बात कर रहे थे. उन्होंने कहा कि उन्हें अपने संबोधन पर मिली सकारात्मक प्रतिक्रिया देखकर खुद हैरानी हुई. ट्रंप बोले, ‘हमारा भाषण अच्छा रहा. हमें शानदार रिव्यू मिले. मुझे यकीन ही नहीं हो रहा.’ इसके बाद उन्होंने मीडिया के नजरिये पर कटाक्ष करते हुए कहा, ‘आमतौर पर वे कहते हैं कि मैं एक भयानक तानाशाह किस्म का इंसान हूं.’ यहीं ट्रंप ने खुद उस टैग को अपना लिया. उन्होंने कहा, ‘मैं तानाशाह हूं. लेकिन कभी-कभी आपको तानाशाह की जरूरत होती है.’
‘मेरे फैसले कॉमन सेंस से जुड़े हैं’
इसके बाद उन्होंने अपने शासन के नजरिये को समझाने की कोशिश की. ट्रंप बोले कि उनके फैसले किसी विचारधारा से नहीं, बल्कि सामान्य समझ से निकलते हैं. उन्होंने कहा, ‘यह न तो कंजरवेटिव है, न लिबरल. यह करीब 95 फीसदी कॉमन सेंस पर आधारित है.’ इससे पहले भी ट्रंप ने माना कि उनकी भाषा कई बार तनाव पैदा करती है, लेकिन उन्होंने जोर देकर कहा कि उनके इरादों को गलत समझा जाता है. उन्होंने कहा, ‘लोगों को लगा कि मैं ताकत का इस्तेमाल करूंगा. लेकिन मुझे ताकत इस्तेमाल करने की जरूरत नहीं है. मैं ताकत नहीं चाहता और न ही करूंगा.’
ग्रीनलैंड पर ट्रंप क्या कह रहे?
दावोस में ट्रंप ने ग्रीनलैंड को लेकर भी बड़ा संकेत दिया. बीते हफ्तों में उनके कड़े बयानों से नाटो सहयोगी देश असहज हो गए थे. लेकिन अब ट्रंप ने साफ कर दिया कि न तो वह सैन्य कार्रवाई करेंगे और न ही दबाव बनाने के लिए टैरिफ लगाएंगे. नाटो प्रमुख मार्क रुटे से मुलाकात के बाद ट्रंप ने कहा कि अब बातचीत सहयोग के रास्ते पर बढ़ रही है. उन्होंने कहा, ‘यह ऐसा समझौता है जिससे हर कोई खुश है. यह लंबी अवधि का सौदा है. यह सुरक्षा और खनिजों के लिहाज से सभी को मजबूत स्थिति में रखेगा.’
ट्रंप ने इसे ‘हमेशा के लिए रहने वाला सौदा’ बताया. उनका कहना है कि डेनमार्क, ग्रीनलैंड और अमेरिका के बीच बातचीत जारी रहेगी, ताकि रूस और चीन कभी भी ग्रीनलैंड में आर्थिक या सैन्य पकड़ न बना सकें. उन्होंने यह भी ऐलान किया कि जिन टैरिफ को लागू करने की तैयारी थी, उन्हें अब रोका जा रहा है. इससे साफ है कि ट्रंप इस मुद्दे पर टकराव की जगह समझौते का रास्ता अपनाना चाहते हैं
