थाईलैंड : PM पैथोंगटार्न शिनवात्रा पद से बर्खास्त, सिर्फ एक साल रही सत्ता में

विदेश

थाईलैंड की राजनीति एक बार फिर बड़े संकट से गुजर रही है. प्रधानमंत्री पैथोंगटार्न शिनवात्रा को देश की संवैधानिक अदालत ने पद से हटा दिया है. पद संभालने के महज़ एक साल बाद ही उन्हें यह झटका लगा. अदालत का कहना है कि पैथोंगटार्न ने नैतिक आचार संहिता का उल्लंघन किया और वे संवैधानिक योग्यता पूरी करने में नाकाम रहीं.

यह फैसला शुक्रवार को सुनाया गया. इसमें अदालत ने माना कि कंबोडिया के पूर्व नेता के साथ हुई एक फोन कॉल लीक कर देना गंभीर अपराध था. अदालत ने साफ कहा कि प्रधानमंत्री के पद पर रहते हुए इस तरह की कार्रवाई थाई संविधान और राजनीतिक शुचिता के खिलाफ है.

अंतरिम सरकार का जिम्मा
अदालत के आदेश के बाद फिलहाल सत्ता की बागडोर उप प्रधानमंत्री फुमथाम वेचायाचाई के हाथों में आ गई है. वे मौजूदा कैबिनेट के साथ मिलकर कार्यवाहक सरकार चलाएंगे. हालांकि यह सिर्फ तब तक होगा जब तक संसद नया प्रधानमंत्री चुनकर देश की कमान नहीं सौंप देती.

कौन बनेगा अगला प्रधानमंत्री?
अब सबकी नजर इस बात पर है कि थाईलैंड का अगला प्रधानमंत्री कौन होगा. 2023 चुनाव से पहले घोषित नामों में से सिर्फ पांच उम्मीदवार अब भी दौड़ में बने हुए हैं.

चैकासेम नितिसिरी (77 वर्ष): पूर्व न्याय मंत्री और अटॉर्नी जनरल. शांत स्वभाव के नेता हैं लेकिन उन्होंने खुद को आगे आने के लिए तैयार बताया है.

अनुतिन चार्नवीराकुल (58 वर्ष): पूर्व उप-प्रधानमंत्री और गृह मंत्री. महत्वाकांक्षी नेता माने जाते हैं. उनकी भुमजैथाई पार्टी ने जून में पैथोंगटार्न की गठबंधन सरकार से अलग होने का बड़ा फैसला लिया था.

पिरापान सालिराथविभागा: मौजूदा ऊर्जा मंत्री.

जुरिन लक्सनाविसित: पूर्व उप-प्रधानमंत्री.

प्रयुथ चान-ओ-चा (71 वर्ष): पूर्व प्रधानमंत्री और 2014 के सैन्य तख़्तापलट के नेता. भले ही अब राजनीति से संन्यास ले चुके हैं और शाही सलाहकार की भूमिका निभा रहे हैं, फिर भी उनका नाम सूची में शामिल है.

सत्ता की कुर्सी तक लंबा रास्ता
नए प्रधानमंत्री बनने के लिए उम्मीदवार को पहले कम से कम 50 सांसदों का समर्थन जुटाना होगा. इसके बाद ही संसद में मतदान होगा. इस वोटिंग में जीतने के लिए कुल 492 सांसदों में से कम से कम 247 वोट चाहिए होंगे.

अगर कोई उम्मीदवार बहुमत नहीं जुटा पाता तो संसद दोबारा बैठक करेगी और प्रक्रिया अगले उम्मीदवारों के लिए दोहराई जाएगी. इस पूरी प्रक्रिया के लिए कोई समय सीमा तय नहीं है. यानी थाईलैंड में सत्ता संघर्ष लंबा खिंच सकता है.

क्यों गई पैथोंगटार्न शिनवात्रा की कुर्सी?
पैथोंगटार्न शिनवात्रा का सत्ता से बाहर होना अचानक भले लगे लेकिन इसके संकेत पिछले कुछ महीनों से मिल रहे थे. विपक्ष लगातार उन पर संवैधानिक मानदंडों को तोड़ने और राजनीति में पारदर्शिता की कमी का आरोप लगा रहा था. अदालत में भी यह तर्क दिया गया कि उन्होंने जिस फोन कॉल को सार्वजनिक किया उससे राष्ट्रीय सुरक्षा और कूटनीतिक विश्वास पर आंच आई.

क्या हो सकता है आगे?
अब थाईलैंड में राजनीतिक अस्थिरता गहराने की आशंका है. संसद में संख्याबल और दलों की खींचतान यह तय करेगी कि कौन प्रधानमंत्री बनेगा. वहीं देश की जनता उम्मीद लगाए बैठी है कि नया नेतृत्व उन्हें स्थिरता और भरोसे की राजनीति देगा.

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