लखनऊ, 31 जनवरी। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष जे. एन. तिवारी ने उत्तर प्रदेश सरकार के मुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री को वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में सम्मिलित किए जाने हेतु कर्मचारी एवं शिक्षकों से संबंधित 14 महत्वपूर्ण प्रस्ताव प्रेषित किए हैं।
तिवारी ने अवगत कराया कि वर्ष 2027 में उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं, ऐसे में यह बजट चुनाव पूर्व बजट है और स्वाभाविक रूप से इससे व्यापक जन-अपेक्षाएँ जुड़ी हुई हैं। उन्होंने कहा कि बजट में लोक कल्याण की स्पष्ट भावना परिलक्षित होनी चाहिए तथा गरीब, मजदूर, नौकरीपेशा और समाज के वंचित वर्गों की आवश्यकताओं की झलक दिखाई देनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि प्रदेश के कर्मचारी पूरी निष्ठा, ईमानदारी एवं समर्पण के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करते हुए सरकार की योजनाओं को सफलतापूर्वक धरातल पर उतार रहे हैं। वर्ष 2047 तक उत्तर प्रदेश को विकसित प्रदेश बनाने के लक्ष्य की प्राप्ति में कर्मचारियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होगी।
संयुक्त परिषद द्वारा भेजे गए प्रस्तावों में प्रमुख रूप से—
आठवें वेतन आयोग के लिए आवश्यक धनराशि का प्रावधान,
राज्य स्तर पर लागू किए जा सकने वाले पेंशन सुधार,
कोविड काल में रोके गए नगर प्रतिकर भत्ते की बहाली,
युवाओं के लिए सरकारी नौकरियों एवं रोजगार सृजन,
वर्ष 2001 के बाद नियुक्त संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण हेतु नियमावली का निर्माण,
आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए गठित निगम का प्रभावी क्रियान्वयन,
आशा बहुओं के लिए निश्चित (फिक्स) मानदेय का निर्धारण,
महिला कर्मियों की सुरक्षा तथा कर्मचारी कल्याण आयोग का गठन,
विभिन्न विभागों में बढ़ रहे निजीकरण पर रोक,
नगरीय परिवहन व्यवस्था को सुदृढ़ करने हेतु नई बसों की खरीद तथा संविदा चालकों-परिचालकों का समायोजन
सहित कुल 14 सूत्रीय मांगें शामिल हैं।
संयुक्त परिषद की महामंत्री अरुणा शुक्ला ने कहा कि महिला सशक्तिकरण को केवल नीतियों तक सीमित न रखकर व्यवहार में लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने महिला संविदा कर्मियों के लिए चाइल्ड केयर लीव, संविदा शिक्षकों एवं कर्मियों को वार्षिक वेतन वृद्धि, तथा चिकित्सा सुविधाएँ बजट में शामिल किए जाने की मांग की।
संयुक्त परिषद के अध्यक्ष जे. एन. तिवारी ने आशा व्यक्त की कि सरकार इस बजट में कर्मचारियों की वास्तविक एवं न्यायोचित समस्याओं पर सकारात्मक रूप से विचार करेगी।
