लखनऊ। मोती झीलए ऐशबाग स्थिति माधव कला मंडप में ममता चैरिटेबल ट्रस्ट के संस्थापक एवं बीजेपी अवध क्षेत्र उपाध्यक्ष राजीव मिश्र कथा समिति के संयोजक एवं कोषाध्यक्ष गौरव पांडे द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत कथा महायज्ञ के दूसरे दिन सुविख्यात कथा प्रवक्ता श्री धाम वृन्दावन के पूज्य संत श्री राम शरण शास्त्री जी महाराज ने बताया धुंधकारीए आत्म देव और धुंधुली के बेटे थे।धुंधकारी दुराचारी और दुष्टथाए जबकि उसका भाई गोकर्ण ज्ञानी और पंडित था। धुंधकारी ने अपने जीवन में कई दुष्कर्म किए। उसने अपनी मां को मार डाला और पिता की सारी संपत्ति नष्ट कर दी।

धुंधकारी के दुष्कर्मों के कारण उसे कष्टदायी मृत्यु मिली और वह प्रेत बन गया। धुंधकारी के भाई गोकर्ण ने प्रेत योनि से मुक्ति दिलाने के लिए सूर्य भगवान के बताए सूत्र पर श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया। धुंधकारी को भागवत कथा सुनने के बाद प्रेत योनि से मुक्ति मिली। इस कहानी से यह सीख मिलती है कि कर्मए धर्म मनुष्य को संयमित और वेद रीतिनीतिसे करना चाहिए।धुंधकारी की मांधुं धुली ने अपने बहन के कहने पर आत्म देव का फल अपनी गाय को खिला दिया था। गाय को एक मनुष्या कार बच्चा हुआए जिसके कान गाय के समान होने के कारण उसका नाम गोकर्ण रखा गया। इसके बाद महाराज श्री ने बताया राजा परीक्षित को भागवत कथा शुकदेव जीने सुनाई थी। शुकदेवजीए वेद व्यास जी के पुत्र थे। शुक देव जी ने राजा परीक्षित को भागवत कथा शुक्रताल में सुनाई थी। आज भी शुक्रताल में वही वट वृक्ष है जिसके नीचे शुक देव जी ने राजा परीक्षित को भागवत कथा सात दिनों तक सुनाई थी। कथा सुनने के बाद राजा परीक्षित का मृत्यु का भय दूर हो गया था। राजा परीक्षित को शमि का ऋषि के पुत्र ने श्राप दिया था कि सात दिनों के भीतरत क्षक सर्प के काटने से उनकी मृत्यु हो जाएगी। ऋषि शमिका ने राजा परीक्षित को ऋषि शुक से मिलने और अगले सात दिनों के लिए श्भागवतमश् सुनने का सुझाव दिया था। कई पौराणिक संस्मरणों के साथ महाराज श्री ने धर्म ज्ञान वैराग्य का सजीव चित्रण किया।

कथा प्रारंभ 51 देवी स्वरूप कन्याओ से दीप प्रज्वलन करने के उपरान्त आरंभ हुआ। राजीव मिश्रए गौरव पांडे एवं कथा समिति के सभी सदस्यों द्वारा आरती की गयी।
कथा मे कमेटी के प्रमुख सदस्य अधिवक्ता संतोष माहेश्वरीए उपाध्यक्ष जितेश श्री वास्तवए अमित गुप्ताए अधिवक्ता आशुतोष मिश्राए अधिवक्ता प्रदीप शर्माए पत्रकार संजय तिवारी एशशि कान्त शुक्ल रौनक सिंह एवं सैकडों की संख्या में भक्त जन मौजूद रहे मौजूद रहे रहे हजारों की संख्या में श्रोता गण को महाराज जी के द्वारा गाए गए दर्जनों भजनों पर झूमते हुए देखा गया।
