आज दिनांक –10 मार्च 2024 को सद्भावना ट्रस्ट, द्वारा अर्तंराष्ट्रीय महिला दिवस के पर्व अवसर पर रुचिकर तरीक़े से स्कूटी रैली का आयोजन किया गया। यह रैली ट्रैफिक प्रोटोकॉल के सभी नियमों का पालन करते हुए हज़रत महल पार्क से होकर डालीगंज पार्क पर समाप्त हुआ। कार्यक्रम का विशेष शीर्षक रहा तोड़ी बंदिशें: टैलेंट को चैलेंज- महिलाओं के सशक्तिकरण और नेतृत्वकारी पहल को सार्वजनिक क्षेत्र में सम्मान।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में रुबीना खातून (सामाजिक कार्यकर्ता), सौम्या चौहान (कंटेंट राईटर), अमरीन (यूथ लीडर), नगमा परवीन (सनतकदा, मैनेजर), ललिता गौतम (इ- रिक्शा ड्राईवर), समरीन खान (यूथ लीडर), भावना राय (फ्रीलेंस कंसल्टेंट), आयशा करीमी (आर्टिस्ट एंड कंटेंट क्रिएटर) रेखा रानी (कम्युनिटी लीडर), बुशरा सिद्दीकी (फिल्म मेकर), अनन्या (विज्ञान फाउंडेशन), फिरदौस (इनोवेटिव ट्रेनर), मरियम (कम्युनिटी ट्रेनर) और शिखा अग्रवाल (यू.पी कोपरेटिव यूनियन लिमिटेट) शामिल हुई। प्रतिएक अतिथियों द्वारा सार्वजनिक क्षेत्र में महिलाओं के सम्मान से जुड़ें अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए कार्यक्रम का आरंभ किया गया। अतिथियों के प्रेणादायक सन्देश ने स्कूटी रैली में लड़कियों और महिलाओं को नया जोश और सक्रिय उर्जा दिया। इस कार्यक्रम में लगभग 100 से ज़्यादा महिला प्रतिभागियों ने अपनी सक्रिय भागीदारी दी।
सद्भावना ट्रस्ट ने इस साल महिलाओं के हुनर व क्षमताओं को सार्वजनिक क्षेत्र में सम्मानित करने के उद्देश्य से महिला दिवस पर स्कूटी रैली का आयोजन बहुत ही यादगार और उर्जावान तरीके से किया। कार्यक्रम में हमीदा खातून (निदेशक, सद्भावना ट्रस्ट) और आमरा क़मर (कार्यक्रम प्रबंधक, सद्भावना ट्रस्ट) द्वारा सभी प्रतिभागियों का अटूट जज़्बे और जोश के साथ स्वागत किया गया। पलक झपकते ही महिलाओं और लड़कियों का हुजूम अपने दुपट्टों का परचम लहराती हुई सड़को पर नज़र आईं। रैली के समापन में हुमा (कायक्रम समन्वयक, सद्भावना ट्रस्ट) और रेखा (लीगल सलाहकार) ने महिलाओं और लड़कियों के टैलेंट के बारे में गहराई से चर्चा किया। जिसमें इस बात पर ज़ोर दिया गया कि सड़क पर बेझिझक होकर स्कूटी या कार चलाना भी महिलाओं के सशक्तिकरण को मज़बूत करता है।
चर्चा के दौरान लड़कियों और महिलाओं ने अपने निजी अनुभवों को साझा करते हुए बताया की जब वे रोड पर स्कूटी चलाती है, तो उन्हें कई बार रूढ़ीवादी विचारधाराओं और लोगों द्वारा बनाये मिथकों से गुज़रना पड़ता है। लेकिन हम इस तरह के नकारात्मक शब्दों से निडर होकर अपने सपनों में और उड़ान भरते है। इसी पित्रसत्तात्मक सोच को तोड़ने के लिए सद्भावना ट्रस्ट ने इस रैली का आयोजन किया है जिसमें हम जैसी कई लड़कियों ने बहुत ही मौज मस्ती के साथ हिस्सेदारी ली और अपनी जैसी अन्य महिलाओं के लिए सुरक्षित जगह बनाने की पहल की।
सद्भावना ट्रस्ट, 2009 से लखनऊ शहर की बस्तियों में हाशिये पर खड़े समुदाय के साथ काम रही हैं। संस्था विशेषकर लड़कियों और महिलाओं के साथ सामाजिक विषयों पर नज़रिया निर्माण करके उन्हें नेतृत्व में लाने का काम करती हैं। साथ ही युवा महिलाओं को तकनीकि कौशल का हुनर देते हुये उनको सशक्त एवं आत्म निर्भर बनने के लिए प्रोत्साहित करती हैं।
यह कार्यक्रम पूर्णरूप से सफल और सराहनीय रहI