नई दिल्ली : पिछले 10 साल में भारत ने रक्षा उत्पादन में जो छलांग लगाई है, उसे सरकार सिर्फ उपलब्धि नहीं बल्कि रणनीतिक ताकत मान रही है. इसी कड़ी में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) ने रविवार को ऐसे आंकड़े पेश किए जो भारत की सैन्य क्षमता का नया स्तर दिखाते हैं. उन्होंने साफ कहा कि देश जो कभी हथियारों के लिए पूरी तरह इम्पोर्ट पर निर्भर था, आज मेक इन इंडिया मॉडल पर तेजी से आगे बढ़ते हुए दुनिया का उभरता हुआ डिफेंस एक्सपोर्टर बन गया है.
राजनाथ सिंह ने बताया कि 2014 में जहां भारत का रक्षा उत्पादन सिर्फ 46000 करोड़ रुपये था, वही आज यह बढ़कर 1.51 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है. एक्सपोर्ट के मोर्चे पर भी भारत ने ऐतिहासिक उछाल लिया है. 10 साल पहले जहां एक्सपोर्ट 1000 करोड़ रुपये से भी कम था, आज यह करीब 24000 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है. सरकार का दावा है कि यह बढ़त सिर्फ आंकड़े नहीं बल्कि भारत की आत्मनिर्भर रक्षा नीति की असली पहचान है.
सीमा पर तैयार हो रहा नया भारत
इन आंकड़ों के साथ रक्षा मंत्री ने बॉर्डर रोड्स ऑर्गेनाइजेशन यानी बीआरओ की बड़ी उपलब्धियों का भी जिक्र किया. लेह में 125 अहम इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स का उद्घाटन करते हुए उन्होंने बताया कि बीआरओ ने 5000 करोड़ रुपये की लागत से 28 सड़कें, 93 पुल और कई रणनीतिक काम पूरे किए हैं. इनमें से ज्यादातर प्रोजेक्ट्स लद्दाख, जम्मू कश्मीर, अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान, पश्चिम बंगाल और मिजोरम जैसे संवेदनशील इलाकों में हैं.
राजनाथ सिंह ने कहा कि बीआरओ ने देश की सुरक्षा जरूरतों के हिसाब से तकनीक और इंजीनियरिंग में जबरदस्त सुधार दिखाया है. क्लास 70 मॉड्यूलर ब्रिज इसका सबसे बड़ा उदाहरण हैं जिन्हें बीआरओ ने गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स के साथ मिलकर पूरी तरह देश में विकसित किया है. यह पुल अब सीधे फॉरवर्ड एरिया में लगाए जा रहे हैं और यह दिखाते हैं कि सीमा पर भारत कितनी तेजी से अपनी क्षमता बढ़ा रहा है.
रिकॉर्ड खर्च, रिकॉर्ड कामयाबी
वित्त वर्ष 2024-25 में बीआरओ ने 16690 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड खर्च किया, जो अब तक का सबसे ज्यादा है. अगला लक्ष्य 2025-26 के लिए 18700 करोड़ रुपये रखा गया है, जिससे साफ है कि सरकार बीआरओ की क्षमता पर पहले से ज्यादा भरोसा दिखा रही है. पिछले दो साल में ही 356 प्रोजेक्ट्स राष्ट्र को समर्पित किए जा चुके हैं, जो किसी भी हिसाब से बड़ा आंकड़ा है.
बीआरओ का काम आसान नहीं है. ये प्रोजेक्ट्स बर्फबारी वाले इलाकों, रेगिस्तान, बाढ़ वाले क्षेत्रों और घने जंगलों में पूरे होते हैं. यही वजह है कि सरकार ने इस बार यूनियन बजट 2025-26 में बीआरओ का बजट बढ़ाकर 7146 करोड़ रुपये किया है.
