सीजफायर पर राहुल गांधी का पीएम मोदी पर हमला, कहा-ट्रंप के कहने पर किया सरेंडर, कांग्रेस ऐसा नहीं करती

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कांग्रेस सांसद राहुल गांधी मंगलवार को मध्य प्रदेश पहुंचे. यहां उन्होंने पार्टी के ज़मीनी स्तर पर मज़बूती और कार्यकर्ताओं में नया जोश भरने के उद्देश्य से शुरू हो रहे अभियान का नेतृत्व किया. आगामी 2028 विधानसभा चुनावों की तैयारी के तहत राहुल गांधी का यह दौरा राजनीतिक दृष्टिकोण से बेहद अहम माना जा रहा है. इस दौरान राहुल गांधी ने कांग्रेस कार्यकर्ता सम्मेलन को संबोधित करते हुए सीजफायर के मुद्दे पर पीएम नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार को घेरा.

राहुल गांधी ने अपने संबोधन में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि आज देश में विचारधारा की लड़ाई चल रही है. एक तरफ कांग्रेस पार्टी और संविधान है और दूसरी ओर बीजेपी-आरएसएस जो इस संविधान को खत्म करना चाहते हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि देश की सभी संवैधानिक संस्थाएं बीजेपी और आरएसएस के नियंत्रण में जा चुकी हैं. सभी संस्थाओं में उन्होंने अपने लोग बैठा दिए हैं और धीरे-धीरे देश का गला घोंट रहे हैं.

संविधान और सामाजिक न्याय की लड़ाई
राहुल गांधी ने अपने भाषण में दो प्रमुख मुद्दों को कांग्रेस की प्राथमिक लड़ाई बताया. पहला, संविधान की रक्षा और दूसरा सामाजिक न्याय की बहाली. उन्होंने कहा, “संसद भवन में मैंने देश से वादा किया था कि चाहे कुछ भी हो जाए, जातिगत जनगणना संसद से पारित होगी. यह सामाजिक न्याय की दिशा में हमारा संकल्प है.”

बीजेपी-आरएसएस पर ‘डरपोक’ होने का आरोप
राहुल गांधी ने सत्ताधारी दल पर हमला बोलते हुए कहा कि मैं बीजेपी और आरएसएस वालों को अच्छे से जान गया हूं. इनको थोड़ा सा दबाओ तो डर कर भाग जाते हैं. उन्होंने इसे विपक्ष की ताकत और जनता की एकजुटता का परिणाम बताया.

सीजफायर पर मोदी और ट्रंप की बातचीत पर तंज
अपने भाषण के दौरान राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा, “उधर से ट्रंप ने फोन किया और इशारा किया कि मोदी जी क्या कर रहे हो? नरेंदर, सरेंडर. और ‘जी हूजूर’ कर के मोदी जी ने ट्रंप के इशारे का पालन किया.

इंदिरा गांधी से की तुलना
राहुल गांधी ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का उदाहरण देते हुए कहा, “आपको एक समय याद होगा जब फोन नहीं आया था बल्कि 7th फ्लीट आई थी लेकिन इंदिरा जी ने कहा था ‘मुझे जो करना है मैं करूंगी’, यह फर्क है. इनका कैरेक्टर है यह, यह सभी ऐसे ही हैं. आजादी के समय से सरेंडर वाली चिट्ठी लिखने की आदत है, ज़रा सा दबाव बना तो ये लोग सरेंडर कर देते हैं. कांग्रेस पार्टी सरेंडर नहीं होती है. गांधी जी, नेहरू जी, सरदार पटेल. यह सरेंडर वाले नहीं बल्कि सुपरपावर से लड़ने वाले लोग हैं.

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