आज इंटरनेट मीडिया पर ऐसे वीडियो की भरमार है, जिनमें प्रोटीन की मात्रा बढ़ाकर वजन घटाने की सलाह दी जाती है। यदि आप भी इन सलाह पर अमल कर रहे हैं तो बता दें कि केवल प्रोटीन लेना ही समाधान नहीं है। यह जानना आवश्यक है कि किसे कितना प्रोटीन चाहिए। मसलन, यह उम्र, लिंग, शारीरिक गतिविधि के स्तर और समग्र सेहत के अलग- अलग कारणों पर निर्भर करता है।
टिश्यूज के निर्माण और मरम्मत के साथ प्रोटीन जरूरी हार्मोन के निर्माण में भी सहायक है। मांसपेशियों की मजबूती, बच्चों के विकास के लिए प्रतिदिन के आहार में प्रोटीन की उचित मात्रा जरूरी है। इससे रोग-प्रतिरोधक क्षमता बेहतर होती है। विशेषकर वजन घटाने और मांसपेशियों के निर्माण के लिए यदि आप प्रोटीन ले रहे हैं, तो इसकी मात्रा, गुणवत्ता आदि को लेकर भी सतर्क रहें।
वजन प्रबंधन से संबंध
कार्बोहाइड्रेट, वसा की तुलना में प्रोटीन से पेट अधिक भरा हुआ महसूस होता है। भूख बढ़ाने में सहायक घेलीन हार्मोन के उचित उत्पादन और प्रबंधन में भी प्रोटीन की भूमिका होती है। इसलिए प्रोटीन और वजन प्रबंधन का ठोस संबंध बताया जाता है। प्रोटीन पाचन क्रिया के दौरान शरीर को उचित कैलोरी प्रदान करने के लिए मदद करता है। अगर उचित मात्रा में प्रोटीन न लिया जाए तो शरीर पर अधिक दवाब पड़ता है।
न बन जाए चुनौती
यदि आप दैनिक आहार में आवश्यकता से अधिक प्रोटीन लेते हैं तो शरीर इसे ग्लूकोज में बदल देता है। यह वसा के रूप में शरीर में इकट्ठा होने लगता है। कैलोरी अधिक हो जाए तो प्रोटीन भी आपका वजन बढ़ा सकता है। प्रोटीन मेटाबोलिज्म प्रक्रिया के बाद जो अपशिष्ट बचता है, वह यूरिया होता है।
यह अधिक बढ़ जाए तो किडनी पर अतिरिक्त भार डालता है। किडनी का कार्य अपशिष्ट को बाहर निकालना है, पर लंबे समय तक वह ऐसा नहीं कर सकता। यदि पहले से किडनी की समस्या है तो यह और भी परेशान कर सकता है। लंबे समय तक अधिक प्रोटीन का सेवन करने से पाचन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं, डिहाइड्रेशन हो सकता है और पोषक तत्वों में असंतुलन भी हो सकता है, यानी आप केवल प्रोटीन लेते रहें तो दूसरे पोषक तत्व लेने में लापरवाही हो सकती है।
प्रोटीन डाइट, ड्रिंक्स या पाउडर
उच्च वसा या अधिक कार्ब युक्त खाद्य पदार्थों नट्स, नट्स बटर, बीन्स, वसा युक्त मीट आदि से प्राप्त प्रोटीन लेना सही नहीं है। यह कैलोरी बढ़ाता है, वजन प्रबंधन की जुड़ी आपकी यात्रा को भी जटिल बना सकता है। इन दिनों प्रोटीन बार, प्रोटीन पाउडर, प्रोटीन स्नैक्स या ड्रिंक्स लेने का चलन तेजी से बढ़ा है। इनका प्रयोग चिकित्सक की सलाह के बगैर नहीं करना चाहिए। प्रोटीन पाउडर हो या ड्रिंक्स, यह वजन प्रबंधन में उस रूप में प्रभावी नहीं हो सकता है, जितना कि दैनिक आहार में स्वस्थ प्रोटीन युक्त आहार योजना से संभव है। बता दें कि इनमें अधिकांश उत्पाद शुगर और कृत्रिम गंध व उच्च कैलोरी युक्त पदार्थ से तैयार होते हैं, जो सेहत पर विपरीत असर डाल सकते हैं।
इन बातों का रहे ध्यान
क्रेविंग यानी अधिक खाने की इच्छा कम करने के लिए प्रोटीन के साथ फाइबर व स्वस्थ वसा भी लेना चाहिए। दैनिक आहार में प्रोटीन एक ही बार में लेने के बजाय हर पहर में इसकी कुछ मात्रा शामिल करें।
उच्च प्रोटीन डाइट जैसे प्रोसेस्ड मीट और सेचुरेटेड फैट के साथ लेने से हृदय या किडनी की बीमारी की आशंका बढ़ती है।
यदि आप उच्च प्रोटीन डाइट लेना चाहते हैं तो पहले किसी डाइटिशियन या विशेषज्ञ से समझ लें।
अगर हाइ स्ट्रेंथ ट्रेनिंग वाले एक्सरसाइज नहीं कर रहे हैं तो उच्च मात्रा में प्रोटीन डाइट नुकसानदेह है। प्रोटीन को अन्य पोषक तत्वों के साथ संतुलित करें। लीन प्रोटीन के लिए चिकन, मछली, अंडे, फलियांव प्लांट बेस्ड प्रोटीन का चुनाव करें। शाकाहारी हैं तो वजन घटाने और प्रोटीन को आहार में शामिल करने के लिए दाल के साथ-साथ बीन्स का उपयोग कर सकते हैं।
ड्राइ फ्रूट्स में प्रोटीन होता है। खासकर बादाम और अखरोट में प्रोटीन के साथ फाइबर की भी अच्छी मात्रा होती है।