पीएम नेतन्याहू ने बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने के ट्रंप के न्योते को किया स्वीकार

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नई दिल्ली । गाजा पीस प्लान के तहत अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने के लिए इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को न्योता भेजा था। इजरायली पीएम ने इस न्योते को स्वीकार कर लिया है। इजरायल के पीएम ऑफिस की तरफ से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा गया, “प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने घोषणा की है कि वह अमेरिकी डोनाल्ड ट्रंप का न्योता स्वीकार करते हैं और बोर्ड ऑफ पीस के सदस्य बनेंगे, जिसमें दुनिया भर के नेता शामिल होंगे।” बता दें, यह बोर्ड दुनिया भर में झगड़ों को सुलझाने के मकसद से बनाई गई एक पहल है, जिसकी शुरुआत गाजा पट्टी से होगी। अमेरिका के राष्ट्रपति इसके चेयरमैन हमेशा रहेंगे।
वहीं राजनयिकों ने चेतावनी दी है कि यह बोर्ड संयुक्त राष्ट्र के काम को नुकसान पहुंचा सकता है। ट्रंप का न्योता स्वीकार करने वालों में इजरायल के साथ अर्जेंटीना, अजरबैजान, बेलारूस, हंगरी, कजाकिस्तान, मोरक्को, यूएई और वियतनाम भी शामिल हैं।
बता दें, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी इस बोर्ड में शामिल होने का न्योता भेजा है। हालांकि, भारत की तरफ से फिलहाल इसपर कोई जवाब सामने नहीं आया है। भारत इस प्रस्ताव पर फिलहाल गंभीरता से विचार कर रहा है।
इसके साथ ही निमंत्रण लिस्ट में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का नाम भी शामिल है। बीते दिन क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने पत्रकारों को इसकी जानकारी दी। कुल 60 देशों को अमेरिका की तरफ से बोर्ड में शामिल होने के लिए न्योता भेजा गया।
रूसी न्यूज एजेंसी के अनुसार, एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, “राष्ट्रपति पुतिन को कूटनीतिक माध्यमों से इस बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने का ऑफर मिला है। हम अभी इस प्रस्ताव का बारीकी से अध्ययन कर रहे हैं।”
उन्होंने आगे कहा, “हम सभी विषयों पर स्पष्टता के लिए अमेरिकी पक्ष से संपर्क करने की उम्मीद करते हैं।”
बोर्ड में शामिल सदस्य देशों का कार्यकाल तीन साल तक सीमित होगा, और स्थायी सदस्यता हासिल करने के लिए कथित तौर पर 1 बिलियन डॉलर का भुगतान करना होगा।
गाजा संघर्ष को खत्म करने के लिए पेश अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की शांति योजना के दूसरे चरण का काम शुरू हो चुका है। ट्रंप ने पीस प्लान के दूसरे चरण के तहत बने फिलीस्तीनी टेक्नोक्रेटिक एडमिनिस्ट्रेशन का समर्थन किया और हमास से पूरी तरह से हथियार डालने और टनल नेटवर्क खत्म करने की मांग की है।
पहले चरण के तहत हमास ने सभी जीवित बंधकों को रिहा कर दिया, हालांकि एक बंधक का शव अब भी हमास ने नहीं लौटाया है। इस वजह से इजरायल के लोग मांग कर रहे हैं कि जब तक हमास आखिरी शव नहीं लौटाता है, तब तक दूसरे चरण की प्रक्रिया शुरू न हो।

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