पीएम मोदी ने की पुतिन से मुलाकात, जाने किस बात ठहाके लगाकर हंस पड़े

विदेश

नई दिल्ली : रूस के कजान शहर में 16वें ब्रिक्स समिट से इतर आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मुलाकात हुई. पीएम मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के हुई द्विपक्षीय मुलाकात में भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर भी उनके साथ बैठे दिखे. इस द्विपक्षीय वार्ता में रूसी राष्ट्रपति ने कुछ ऐसा कहा जिससे बैठक में मौजूद सारे लोग हंस पड़े. उन्होंने कहा, ‘हमारे तो आपसे ऐसे रिश्ते हैं कि लगता ही नहीं कि ट्रांसलेशन की जरूरत पड़ेगी.’ इस पर रूसी प्रतिनिधिमंडल भी हंस पड़ा और नरेंद्र मोदी भी ठहाका लगाने लगे.

राष्ट्रपति पुतिन ने कहा, ‘रूस और भारत के बीच जो सहयोग चल रहा है, उसे हम बहुत अहम मानते हैं. दोनों देश मूल सदस्य देश हैं ब्रिक्स के. रूस और भारत के बीच स्पेशल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप है. ये रिश्ता बढता रहेगा. हमारे विदेश मंत्री संपर्क में रहते हैं. हमारे व्यापार भी आगे बढ़ रहा है. 12 दिसंबर को नई दिल्ली में अगली बैठक भी होगी. हमारी बड़ी योजनाएं विकसित हो रही हैं. आपने जो कजान में भारत का काउंसिल जनरल खोलने का फैसला किया है उसका स्वागत करते हैं.’ इसके साथ ही उन्होंने कहा, ‘भारत की कूटनीतिक उपस्थिति से हमारे सहयोग को फायदा मिलेगा. हम आपको यहां पाकर बहुत खुश हैं.’

राष्ट्रपति पुतिन से क्या बोले पीएम मोदी?
वहीं पीएम मोदी ने रूसी राष्ट्रपति के इस अभिवादन का धन्यवाद देते हुए कहा, ‘मैं आपकी मित्रता और गर्मजोशी भरे स्वागत के लिए आपका आभार व्यक्त करता हूं… इस शहर के साथ भारत के गहरे और ऐतिहासिक संबंध रहे हैं. कजान में भारत के नए कांसुलेट खुलने से ये संबंध और मजबूत होंगे.’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, ‘पिछले 3 महीनों में मेरा दो बार रूस आना हमारे करीबी समन्वय और गहरी मित्रता को दर्शाता है… पिछले 1 वर्ष में ब्रिक्स की सफल आवश्यकता के लिए मैं आपको बधाई देता हूं. 15 वर्षों में ब्रिक्स ने अपनी विशेष पहचान बनाई है और अब विश्व के सफल देश इससे जुड़ना चाहते हैं. कल मैं ब्रिक्स सम्मलेन में हिस्सा लेने के लिए उत्सुक हूं.’

रूस-यूक्रेन जंग पर बोले पीएम मोदी
पीएम मोदी ने इसके साथ ही रूस-यूक्रेस के बीच जारी जंग पर भी अपनी बात रखते हुए कहा, ‘रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे संघर्ष के विषय पर हम लगातार संपर्क रहे हैं. जैसा कि मैंने पहले कहा है, हमारा मानना है कि समस्याओं का समाधान शांतिपूर्ण तरीके से किया जाना चाहिए. हम शांति और स्थिरता की जल्द से जल्द बहाली का पूरा समर्थन करते हैं. हमारे सभी प्रयास मानवता को प्राथमिकता देते हैं. भारत आने वाले समय में हर संभव सहयोग देने के लिए तैयार है.’

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