मध्य पूर्व (Middle East) में ईरान और इजरायल के बीच छिड़ा युद्ध अब एक भीषण क्षेत्रीय संकट में बदल चुका है। जहाँ एक ओर खाड़ी देशों—सऊदी अरब, यूएई और कुवैत—पर मिसाइलों और ड्रोनों की बरसात हो रही है, वहीं दूसरी ओर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस वैश्विक तनाव से उपजे एलपीजी (LPG) संकट पर देशवासियों को आश्वस्त किया है। दिल्ली में आयोजित एक समिट के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऊर्जा संकट पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा:
वैश्विक युद्ध का प्रभाव: “हमारे पड़ोस (मिडल ईस्ट) में चल रहा यह युद्ध पूरी दुनिया को बड़े ऊर्जा संकट में डाल चुका है। कोई भी देश इसके प्रभाव से अछूता नहीं है।”
पैनिक फैलाने वालों को चेतावनी: पीएम ने एलपीजी की किल्लत की खबरों पर कहा कि कुछ लोग जानबूझकर ‘पैनिक’ (डर) पैदा कर अपना एजेंडा चला रहे हैं। उन्होंने साफ किया कि ऐसा करने वाले लोग देश का नुकसान कर रहे हैं और जनता के सामने खुद एक्सपोज हो रहे हैं।
सरकार की प्रतिबद्धता: प्रधानमंत्री ने भरोसा दिलाया कि भारत इस संकट से निपटने के लिए कोई कसर बाकी नहीं छोड़ रहा है।
जमीनी हस्तर पर स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। यूएई के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, पिछले 24 घंटों में 10 बैलिस्टिक मिसाइलों और 26 ड्रोनों को इंटरसेप्ट किया गया है। ईरान की ओर से हो रहे इन हमलों में अब तक 6 विदेशी नागरिकों (पाकिस्तानी, नेपाली और बांग्लादेशी सहित) की जान जा चुकी है।
तेल क्षेत्रों पर हमला: सऊदी अरब ने शायबाह तेल क्षेत्र की ओर आ रहे ड्रोनों को मार गिराया है। साथ ही, रियाद के पास अल-खर्ज में नागरिक सुरक्षा चेतावनी जारी की गई है।
सायरन की गूँज: बहरीन और कुवैत में लगातार हवाई हमलों के सायरन बज रहे हैं। कुवैती सेना ने जनता से सुरक्षा निर्देशों का पालन करने की अपील की है।
इजरायल ने अपनी कार्रवाई तेज करते हुए तेहरान में ‘बसीज बलों’ पर बमबारी की है। वहीं बेरूत में लेबनानी यूनिवर्सिटी पर हुए हमले में दो शीर्ष शिक्षाविदों की मौत हो गई है, जिसकी लेबनानी राष्ट्रपति जोसेफ औन ने कड़ी निंदा की है। इजरायल ने बेरूत में हिजबुल्लाह के कथित ‘शैडो बैंक’ (al-Qard al-Hassan) को भी निशाना बनाया है, जहाँ लाखों डॉलर होने का दावा किया गया है।
ऊर्जा संकट की गंभीरता को देखते हुए इटली ने अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के साथ मिलकर अपने रणनीतिक भंडार से 9.966 मिलियन बैरल तेल जारी करने का फैसला किया है ताकि कीमतों को स्थिर रखा जा सके।
