लखनऊ। प्रदेश के फार्मासिस्ट संवर्ग ने अपनी विभिन्न लंबित मांगों को लेकर शासन से शीघ्र निर्णय लेने की मांग की है। संवर्ग के प्रतिनिधियों का कहना है कि चिकित्सालयों में चिकित्सकों की अनुपस्थिति के दौरान फार्मासिस्टों को प्राथमिक उपचार देने के लिए अधिकृत किया जाए, जिससे मरीजों को समय पर उपचार मिल सके।
इसके साथ ही राजकीय चिकित्सालयों एवं मेडिकल कॉलेजों में भोजन (डाइट) व्यवस्था का कार्य फार्मासिस्टों को सौंपने, चिकित्सा प्रतिपूर्ति बिलों की जांच का अधिकार देने तथा फार्मेसी से जुड़े प्रभारी एवं विशेष कार्याधिकारी पदों की संख्या बढ़ाने की मांग भी उठाई गई है।

फार्मासिस्ट संवर्ग ने पदनाम में संशोधन करते हुए फार्मासिस्ट एवं चीफ फार्मासिस्ट का नाम क्रमशः फार्मेसी अधिकारी एवं मुख्य फार्मेसी अधिकारी किए जाने की मांग की है। साथ ही, उ०प्र० मेडिकल सप्लाई कॉरपोरेशन, ड्रग वेयरहाउस एवं नवसृजित चिकित्सालयों में नए पद सृजित करने और राजपत्रित पदों के वेतनमान को उच्चीकृत करने की भी मांग रखी गई है।

संवर्ग ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो वे आगे आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
