वियना/तेहरान। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने पुष्टि की है कि ईरान के दक्षिण-पश्चिम में स्थित बुशहर परमाणु ऊर्जा संयंत्र पर एक प्रोजेक्टाइल गिरा है। परमाणु तकनीकों की देखरेख करने वाली संयुक्त राष्ट्र की संस्था आईएईए ने एक बयान में कहा कि ईरान ने मंगलवार शाम को इस घटना की जानकारी दी. आईएईए के बयान में स्पष्ट किया गया है कि “संयंत्र को किसी तरह का नुक़सान होने या कर्मचारियों को चोट लगने की कोई रिपोर्ट नहीं मिली है.” प्रोजेक्टाइल के गिरने से परमाणु सुरक्षा पर कोई तत्काल ख़तरा पैदा नहीं हुआ है.
IAEA की “अत्यधिक संयम” बरतने की अपील
आईएईए के महानिदेशक रफ़ाएल ग्रोसी ने इस घटना पर गहरी चिंता व्यक्त की है. उन्होंने एक बार फिर संघर्षरत पक्षों से अपील की है कि: “संघर्ष के दौरान ज़्यादा से ज़्यादा संयम बरता जाए, ताकि किसी भी परमाणु दुर्घटना के जोखिम को टाला जा सके.”
बुशहर परमाणु ऊर्जा संयंत्र ईरान के परमाणु कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है. यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब क्षेत्र में इसराइल और ईरान के बीच तनाव चरम पर है. अली लारिजानी की मौत के बाद ईरान पहले ही इसराइल पर मिसाइलें दागने का दावा कर चुका है. ऐसे में परमाणु संयंत्र के पास प्रोजेक्टाइल गिरना किसी बड़ी दुर्घटना का संकेत दे सकता है.
बग़दाद में अमेरिकी दूतावास पर ताज़ा हमला; ‘ग्रीन ज़ोन’ में धमाकों से दहली इराक़ी राजधानी
बग़दाद। इराक़ की राजधानी बग़दाद में स्थित अमेरिकी दूतावास पर एक बार फिर ताज़ा हमले हुए हैं. समाचार एजेंसी एएफ़पी और रॉयटर्स के मुताबिक़, स्थानीय समय के अनुसार बुधवार तड़के ये हमले किए गए.
सुरक्षित ‘ग्रीन ज़ोन’ में हमला
अमेरिकी दूतावास बग़दाद के अत्यधिक सुरक्षा वाले ‘ग्रीन ज़ोन’ इलाक़े में स्थित है. इस क्षेत्र में कई देशों के राजनयिक मिशन और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के दफ़्तर मौजूद हैं. शहर में मौजूद एएफ़पी के पत्रकारों ने दूतावास के पास ज़ोरदार धमाकों की आवाज़ें सुनीं. सुरक्षा सूत्रों के हवाले से इन हमलों की ख़बर दी गई है.
अमरीकी ठिकानों पर लगातार हमले
अमेरिका-इसराइल और ईरान के बीच युद्ध शुरू होने के बाद से इराक़ और क्षेत्र के अन्य हिस्सों में अमेरिकी ठिकानों पर हमले तेज़ हो गए हैं. यह हमला इस बात का संकेत है कि तनावपूर्ण माहौल में अमेरिकी मिशनों और सैनिकों के लिए ख़तरा बढ़ गया है.
हाल ही में इराक़ में एक अमेरिकी सैन्य विमान भी क्रैश हुआ था, जिससे क्षेत्र में अमेरिकी उपस्थिति पर सवाल उठने लगे हैं.
