लेबनान के राष्ट्रपति ने सीमा पर तनाव के बीच इजरायल के साथ कूटनीति का आह्वान किया

विदेश

बेरूत । राष्ट्रपति जोसेफ आउन ने कहा कि लेबनान के पास इजरायल के साथ बातचीत करने के अलावा कोई चारा नहीं है। साथ ही उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि युद्ध से पहले कूटनीति को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। राष्ट्रपति कार्यालय की ओर से इन बयानों की पुष्टि की गई। आउन ने सोमवार को बाबदा पैलेस में अधिकारियों के साथ एक मीटिंग के दौरान कहा, “राजनीति में तीन चीजें होती हैं- डिप्लोमेसी, इकॉनमी और युद्ध। जब युद्ध से कुछ हासिल नहीं होता, तो हम और क्या कर सकते हैं? दुनिया का हर युद्ध आखिरकार बातचीत से ही खत्म होता और बातचीत कभी भी किसी दोस्त या सहयोगी से नहीं, बल्कि दुश्मन से होती है।” उन्होंने आगे कहा कि “बातचीत की भाषा युद्ध की भाषा से अधिक जरूरी है, जिससे हमने देखा है कि सिर्फ तबाही होती है।” उन्होंने लेबनान की लीडरशिप की डिप्लोमेटिक कोशिशों की तारीफ की, जिसमें पार्लियामेंट के स्पीकर नबीह बेरी और प्रधानमंत्री नवाफ सलाम शामिल हैं।”
उन्होंने कहा कि लेबनान के नेशनल इंटरेस्ट को पॉलिटिकल, धार्मिक और सांप्रदायिक बातों से अधिक अहमियत मिलनी चाहिए। सिन्हुआ न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने नेताओं से चुनावी महत्वाकांक्षाओं से ऊपर राष्ट्रीय एकता को प्राथमिकता देने और उन सांप्रदायिक बंटवारे से आगे बढ़ने का आग्रह किया, जिन्होंने लंबे समय से देश की स्थिरता को कमजोर किया है।
अक्टूबर के आखिर में, आउन ने लेबनानी सेना को ब्लिडा के सीमावर्ती गांव पर हुए जानलेवा हमले के बाद दक्षिण में किसी भी इजरायली घुसपैठ का जवाब देने का आदेश दिया था, जिसका हिज्बुल्लाह नेता नईम कासिम ने स्वागत किया था।
पिछले साल नवंबर के आखिर से इजरायल और हिज्बुल्लाह के बीच अमेरिका और फ्रांस की मध्यस्थता से हुआ सीजफायर लागू है, जिससे गाजा में युद्ध के कारण महीनों से चल रही सीमा पार दुश्मनी रुक गई है।
युद्धविराम के बावजूद, इजरायल ने लेबनान में हमले करना जारी रखा है। हालांकि यह हमले लगातार नहीं किए जा रहे हैं, लेकिन इजरायल का कहना है कि वह हिज्बुल्लाह के ‘खतरों’ को निशाना बना रहा है। लेबनान और कई अंतर्राष्ट्रीय संगठनों ने इन हमलों की निंदा करते हुए इन्हें सीजफायर का उल्लंघन बताया है।

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