बलरामपुर चिकित्सालय, लखनऊ के 157वें स्थापना दिवस पर भव्य समारोह का आयोजन; निदेशक डॉ. कविता आर्य के नेतृत्व में निरंतर प्रगति की ओर अग्रसर संस्थान

उत्तर प्रदेश राज्य लखनऊ शहर

लखनऊ। राजधानी के ऐतिहासिक एवं प्रतिष्ठित बलरामपुर चिकित्सालय ने आज अपनी गौरवशाली सेवा यात्रा के 157 वर्ष पूर्ण कर लिए हैं। इस उपलक्ष्य में आयोजित भव्य स्थापना दिवस समारोह को संबोधित करते हुए चिकित्सालय से जुड़े सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को बधाई दी गई।

​विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति:
समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में मा० राज्यमंत्री, उत्तर प्रदेश सरकार श्री मयंकेश्वर शरण सिंह जी उपस्थित रहे। कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाने हेतु महानिदेशक (परिवार कल्याण) डॉ० पवन कुमार अरुण जी, महानिदेशक (प्रशिक्षण) डॉ० एच०डी० अग्रवाल जी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ० एन०बी० सिंह जी और चिकित्सा अधीक्षक डॉ० देवाशीष शुक्ला जी सहित कई अन्य गणमान्य चिकित्सा अधिकारी मौजूद रहे।

​सेवा और शिक्षा का संगम:
चिकित्सालय की निदेशक डॉ० कविता आर्य जी के कुशल निर्देशन में संस्थान न केवल उत्तम चिकित्सा सेवाएँ प्रदान कर रहा है, बल्कि यह नर्सिंग और अन्य महत्वपूर्ण चिकित्सा पाठ्यक्रमों के लिए भी एक उत्कृष्ट केंद्र के रूप में अपनी पहचान बना चुका है।

​आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम:
स्थापना दिवस के इस अवसर पर चिकित्सालय की उपलब्धियों की चर्चा करते हुए बताया गया कि 776 बेड की क्षमता वाला यह अस्पताल अब बिजली उत्पादन के क्षेत्र में भी आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ा चुका है। संस्थान का यह स्वर्णिम इतिहास और वर्तमान की प्रगति स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति इसकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
​समारोह के अंत में सभी अतिथियों ने चिकित्सालय की भविष्य की योजनाओं और जन-कल्याणकारी कार्यों के प्रति अपनी शुभकामनाएँ व्यक्त कीं।

एक सदी से ऊपर बीता, सेवा का संकल्प पुराना है,
बलरामपुर चिकित्सालय का, गौरवमयी अफसाना है।
157 वर्षों की गरिमा, जन-जन का विश्वास यहाँ,
बीमारों को मिलता जीवन, है ममता का वास यहाँ।
​न केवल उत्तम उपचार मिले, यहाँ शिक्षा की भी धार है,
नर्सिंग और चिकित्सा के पथ पर, उन्नति का विस्तार है।
डॉ. कविता आर्य जी के कुशल निर्देशन में, बढ़ रहा मान यहाँ,
हर पीड़ित के जख्मों पर, लग रहा प्रेम का मरहम यहाँ।
​माननीय मंत्रियों और दिग्गजों का, मिला यहाँ सानिध्य सदा,
मरीज के चेहरे की मुस्कान ही, है सबसे बड़ी उपलब्धि सदा।
तपस्या है डॉक्टरों की, और नर्सों का त्याग यहाँ,
गूँज रहा है मानवता का, पावन मंगल राग यहाँ।
​स्थापना दिवस के इस उत्सव पर, हम सब मिलकर शीश झुकाते हैं,
अतुलनीय इस सेवा-यात्रा को, सादर नमन पहुँचाते हैं।

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