नई दिल्ली : जापान के सहयोग से बनाई जा रही देश की पहली हाई स्पीड बुलेट ट्रेन (High Speed Bullet Tarin) पर सरकार ने ताजा अपडेट दिया है. इसमें बताया है कि प्रोजेक्ट के लिए निर्धारित धनराशि में से अब तक करीब 80 हजार करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं. गुजरात से मुंबई तक ट्रैक बिछाने का काम तेजी से चल रहा है, लेकिन रास्ते की सबसे बड़ी मुश्किल समंदर है. इस पर पुल बनाने के बजाय टनल बनाने की तैयारी है और काम शुरू भी हो चुका है. प्रोजेक्ट का अब तक कितना पहुंचा, इसकी पूरी डिटेल का खुलासा सरकार ने किया है.
सरकार ने संसद में बताया कि बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट पर 30 जून, 2025 तक 78,839 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं. मुंबई से अहमदाबाद तक चलने वाली इस हाईस्पीड ट्रेन का काम भी हाई स्पीड से चल रहा है. प्रोजेक्ट का कुल खर्चा 1.08 लाख करोड़ रुपये तय किया गया था और इसमें से करीब 80 फीसदी रकम का इस्तेमाल भी किया जा चुका है. सरकार की मानें तो बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट का काम भी 80 फीसदी पूरा हो चुका है. 508 किलोमीटर के इस ट्रैक पर अब सबसे मुश्किल हिस्से का काम चल रहा है.
अब तक कितना काम पूरा
रेल मंत्री अश्विणी वैष्णव ने संसद में बताया कि प्रोजेक्ट के लिए जरूरी 1,389.5 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण पूरा किया जा चुका है. साथ ही वाइल्डलाइफ, कोस्टल रेगुलेशन जोन और वन विभाग की ओर से जरूरी सभी मंजूरियां भी प्राप्त की जा चुकी हैं. पूरे प्रोजेक्ट को 28 पैकेज में बांटा गया है, जिसमें से 24 पैकेज का टेंडर भी अब तक दिया जा चुका है. इतना ही नहीं सभी 1,651 यूटिलिटी शिफ्ट भी पूरी हो चुकी है. इसका इस्तेमाल प्रोजेक्ट का काम पूरा करने के लिए किया जाता है.
कितना लंबा ट्रैक पूरा
रेल मंत्री ने बताया कि प्रोजेक्ट के 508 किलोमीटर में से अब तक 406 किलोमीटर ट्रैक का काम भी पूरा हो चुका है. इसमें से 350 किलोमीटर का ट्रैक गुजरात में है तो 56 किलोमीटर महाराष्ट्र में है. 395 किलोमीटर पियर्स का काम भी पूराहो चुका है, जिसमें से 350 किमी गुजरात तो 45 किमी महाराष्ट्र में है. 333 किलोमीटर से ज्यादा लंबे ट्रैक पर गिरडर बनाने का काम भी पूरा हो चुका है, जिसमें 332 किमी गुजरात तो 1.67 किमी महाराष्ट्र में है. प्रोजेक्ट के लिए बनाई जा रही 127 किमी वायडक्ट पर ट्रैक बिछाने का काम भी शुरू हो चुका है. साथ ही इस ट्रैक पर ओवरहेड इलेक्ट्रिफिकेशन (OHE) का काम भी चल रहा है.
कितने स्टेशन और ब्रिज बने
इस प्रोजेक्ट पर कुल 12 स्टेशन बनाए जाने हैं, जिसमें से 8 पर फाउंडेशन काम पूरा हो चुका है. इन स्टेशनों में गुजरात के वापी, सूरत, वडोदरा, अहमदाबाद और साबरमती शामिल हैं, जबकि महाराष्ट्र में थाने, विरार और बोइसर में निर्माण कार्य शुरू किया जा चुका है. मुंबई बीकेसी टर्मिनल का काम भी लगभग पूरा हो चुका है. प्रोजेक्ट के लिए नदियों पर 17 पुल का निर्माण कार्य भी पूरा हो चुका है. इसके अलावा गुजरात और महाराष्ट्र में 4-4 बड़े पुल बनाने का काम भी चल रहा है. थाणे, सूरत और साबरमती में डिपो बनाने का काम भी तेजी से चल रहा है.
सबसे मुश्किल प्राजेक्ट पर काम शुरू
गुजरात में एकमात्र टनल का निर्माण पूरा हो चुका है, जबकि समंदर के नीचे बनने वाले 21 किलोमीटर की टनल पर काम भी शुरू हो चुका है. इस टनल का 4 किलोमीटर का स्ट्रेच एरिया महाराष्ट्र के घनसोली और सिलफटा के बीच पूरा भी हो चुका है. इस प्रोजेक्ट ने हजारों की संख्या में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष नौकरियां पैदा की हैं. प्रोजेक्ट को तय टाइमलाइन पर पूरा करने का प्रयास है, जिसमें सबसे अहम काम समंदर के नीचे ट्रैक बिछाना है.
