नई दिल्ली : आजादी से भी पहले शुरू किए गए बैंक में सरकार अपनी हिस्सेदारी घटाने की तैयारी में है. साल 1935 से सेवा कर रहे बैंक ऑफ महाराष्ट्र में सरकार अपनी हिस्सेदारी घटाकर 75 फीसदी से नीचे लाने की तैयारी कर रही है. बैंक के प्रबंध निदेशक और सीईओ निधु सक्सेना ने बताया कि चालू वित्तवर्ष में पूंजी जुटाने के एक और चरण के बाद 25 प्रतिशत की न्यूनतम सार्वजनिक हिस्सेदारी की शर्त पूरी कर ली जाएगी और सरकार की हिस्सेदारी बैंक में घटकर 75 फीसदी से नीचे आ जाएगी.
सक्सेना ने कहा कि शेयर बिक्री के एक और चरण से बैंक को पूंजी पर्याप्तता और सरकार की हिस्सेदारी में कमी लाने में मदद मिलेगी. वित्त मंत्रालय ने सार्वजनिक क्षेत्र के पांच बैंकों को एक अगस्त, 2026 तक सार्वजनिक शेयरधारिता सीमा बढ़ाकर 25 प्रतिशत करने को कहा है. इसका मतलब है कि सरकार बैंक ऑफ महाराष्ट्र के अलावा 4 और बैंकों में अपनी हिस्सेदारी घटाने पर विचार कर रही है.
क्यों आई ऐसी नौबत
सरकारी बैंकों में सरकार की हिस्सेदारी घटाने की वजह भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड द्वारा जारी प्रतिभूति अनुबंध (विनियमन) नियमों के अनुरूप है. इसके अनुसार, सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों सहित सभी सूचीबद्ध कंपनियों में न्यूनतम 25 प्रतिशत सार्वजनिक शेयरधारिता होनी चाहिए. इसका मतलब है कि 25 फीसदी शेयर पब्लिक के पास होने चाहिए और सरकार की हिस्सेदारी 75 फीसदी से कम ही रहनी चाहिए. पूंजी बाजार नियामक सेबी ने केंद्रीय लोक उपक्रमों और सार्वजनिक क्षेत्र के वित्तीय संस्थानों को अगस्त, 2026 तक इससे छूट दी है.
हिस्सा बेचकर कितना पैसा कमाएगी सरकार
पुणे स्थित इस बैंक में अभी सरकार की हिस्सेदारी 79.6 प्रतिशत है. बैक के एमडी सक्सेना ने कहा कि बैंक के मौजूदा बाजार पूंजीकरण के अनुसार, सरकार अपनी हिस्सेदारी बेचकर लगभग 2,000-2,500 करोड़ रुपये जुटा सकता है और इसी के साथ सरकार की हिस्सेदारी 75 प्रतिशत से नीचे आ जाएगी. उन्होंने कहा कि बैंक ने ऋण और इक्विटी के माध्यम से 7,500 करोड़ रुपये जुटाने की मंजूरी पहले ही ले ली है. बैंक ऑफ महाराष्ट्र ने अक्टूबर में क्यूआईपी (पात्र संस्थागत नियोजन) के माध्यम से 3,500 करोड़ रुपये जुटाए थे. इसके बाद बैंक में सार्वजनिक हिस्सेदारी सितंबर के अंत के 13.5 प्रतिशत से बढ़कर 20.4 प्रतिशत हो गई.
और किन बैंकों पर है नजर
सक्सेना के अनुसार, बैंक ऑफ महाराष्ट्र ने अभी तक यह तय नहीं किया है कि पूंजी पात्र संस्थागत नियोजन के माध्यम से जुटायी जाएगी या फिर बिक्री पेशकश के जरिये, क्योंकि हम अभी भी स्थिति का मूल्यांकन कर रहे हैं. सरकार को जिन 5 सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में अपनी हिस्सेदारी कम करनी है, उनमें बैंक ऑफ महाराष्ट्र तुलनात्मक रूप से अच्छी स्थिति में है. इसके अलावा इंडियन ओवरसीज बैंक में सरकार की हिस्सेदारी 94.6 प्रतिशत, पंजाब एंड सिंध बैंक में 93.9 प्रतिशत, यूको बैंक में 91 प्रतिशत और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया में 89.3 प्रतिशत है. इन बैंकों में भी सरकार को अपना हिस्सा घटाकर 75 फीसदी से कम करना है.