विवादित सीमा पर भारत और चीन की सेनाओं का विस्तार दोनों परमाणु शक्तियों के बीच सशस्त्र टकराव का जोखिम बढ़ा

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विवादित सीमा पर भारत और चीन की सेनाओं का विस्तार, दोनों परमाणु शक्तियों के बीच सशस्त्र टकराव का जोखिम बढ़ा रहा है। यूएस इंटेलिजेंस की रिपोर्ट में यह बात कही गई है। यूएस इंटेलिजेंस कम्युनिटी के एनुअल थ्रेट असेसमेंट के अनुसार, इससे अमेरिकी व्यक्तियों और उनके हितों को खतरा हो सकता है। लिहाजा, अमेरिकी हस्तक्षेप की मांग की जा सकती है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि 2020 में भारत-चीन के घातक संघर्ष के मद्देनजर दोनों देशों के संबंध तनावपूर्ण रहेंगे, जो पिछले कुछ दशकों में सबसे गंभीर है। यह स्थिति तब है, जब दोनों देशों द्वारा द्विपक्षीय सीमा वार्ता हुई है और सीमा के मुद्दों को हल किया गया है।

बता दें कि भारत-चीन सीमा मामलों (WMCC) पर परामर्श और समन्वय के लिए बने कार्य तंत्र यानी वर्किंग मैकेनिज्म की 26वीं बैठक 22 फरवरी 2023 को बीजिंग में हुई थी, जो जुलाई 2019 के बाद पहली व्यक्तिगत बैठक थी।

छोटा टकराव भी ले सकता है बड़ा रूप

यूएस इंटेलिजेंस रिपोर्ट के अनुसार, भारत और चीन के बीच पिछले गतिरोध से सामने आया है कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर लगातार निम्न-स्तरीय टकराव तेजी से बढ़ने की क्षमता रखते हैं। वास्तविक नियंत्रण रेखा पर चीन के साथ चल रहे सैन्य गतिरोध के बीच रक्षा खुफिया एजेंसियों ने हाल ही में कड़ा निर्देश जारी किया था, जिसमें कहा गया था कि यह सुनिश्चित किया जाए कि सैनिक चाइनीज मोबाइल फोन का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं।

सैन्यकर्मियों को चीनी फोन इस्तेमाल न करने की सलाह

रक्षा खुफिया एजेंसियों की ओर से जारी परामर्श में कहा गया है कि विभिन्न रूपों और चैनलों के माध्यम से अपने कर्मियों को चीनी मोबाइल फोन के साथ सावधानी बरतने के लिए जानकारी दें।

एएनआई को मिली इस एडवाइजरी में सैन्य जासूसी एजेंसियों ने कहा है कि भारत के शत्रु देशों से फोन खरीदने या उपयोग करने से सैनिकों और उनके परिवारों को हतोत्साहित किए जाए।

जासूसी एजेंसियों को फोन में मिले स्पाईवेयर

सूत्रों ने कहा कि बलों ने एडवाइजरी इसलिए जारी की है क्योंकि एजेंसियों को कथिततौर पर चीन के मोबाइल फोन में मैलवेयर और स्पाईवेयर मिले हैं। पहले भी जासूसी एजेंसियां चीनी मोबाइल फोन एप्लिकेशन के खिलाफ बहुत सक्रिय रही हैं और ऐसे कई एप्लिकेशन सैन्यकर्मियों के फोन से हटा दिए गए थे।

इन कंपनियों के फोन इस्तेमाल नहीं करने की दी सलाह

जासूसी एजेंसियों ने इकाइयों और संरचनाओं को सूची में बताए गए फोन का इस्तेमाल नहीं करने की सलाह दी है। देश के वाणिज्यिक बाजार में उपलब्ध चीनी मोबाइल फोन में वीवो, ओप्पो, श्याओमी, वन प्लस, ऑनर, रियल मी, जेडटीई, जियोनी, आसुस और इनफिनिक्स शामिल हैं।

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