विवेकानन्द पॉलीक्लिनिक एवं आयुर्विज्ञान विज्ञान संस्थान, लखनऊ – एक 500 बिस्तरों वाला, एन.ए.बी.एच. मान्यता प्राप्त सुपर-स्पेशियलिटी अस्पताल एवं शिक्षण संस्थान है जिसमें 14 विषयों में डी0एन0बी0, 8 विषयों में पैरामेडिकल कोर्स साथ ही नर्सिग संस्थान है जिसमें जीएनएम, बीएससी एवं एमएससी नर्सिग कोर्स का संचालन होता है, जो पिछले 8 दशकों से लखनऊ एवं आसपास के क्षेत्रों तथा नेपाल तक के मरीजों को 24×7 आपातकालीन विभाग से संबद्ध एक नई ट्रॉमा सर्जरी यूनिट के साथ ही अत्याधुनिक डायग्नोस्टिक सेवाएं प्रदान करता आ रहा है।

विवेकानन्द पॉलीक्लिनिक एवं आयुर्विज्ञान विज्ञान संस्थान, लखनऊ के रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग द्वारा टीबी उन्मूलन की दिशा में निरंतर सराहनीय प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर ड्रग रेजिस्टेंट टीबी केयर के तत्वाधान में *विवेकानन्द पॉलीक्लिनिक एवं आयुर्विज्ञान विज्ञान संस्थान, लखनऊ व विवेकानन्द कॉलेज ऑफ नर्सिग, लखनऊ द्वारा “टीबी मुक्त भारत” अभियान के तहत 25-25 टी0बी0 से पीड़ित मरीजों (कुल 50) को आज दिनांक 31.03.2026 को गोद लिया गया और उन्हें रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम, विवेकानन्द पॉलीक्लिनिक एवं आयुर्विज्ञान विज्ञान संस्थान, लखनऊ के सचिव स्वामी मुक्तिनाथानन्द जी महाराज द्वारा प्रत्येक मरीजों को पोषण पोटली लखनऊ के महानगर स्थित भाऊराव देवरस सिविल अस्पताल में प्रदान की गई*। यह पोषण पोटली विवेकानन्द पॉलीक्लिनिक एवं आयुर्विज्ञान विज्ञान संस्थान, लखनऊ के सहयोग से उपलब्ध करायी गयी। पोषण पोटली में मूगफली, भूना चना, गुण, सत्तु, तिल का गजक प्रत्येक 1 किलोग्राम पोटली में था। इस कार्यक्रम का उद्देश्य टीबी मरीजों को बेहतर पोषण सहायता प्रदान करना एवं उनके शीघ्र स्वास्थ्य लाभ में सहयोग करना है।
*इस अवसर पर संस्थान के सचिव स्वामी मुक्तिनाथानन्द जी महाराज* ने कार्यक्रम में उपस्थित डा0 विशाल कुमार सिंह जी, भाऊराव देवरस सिविल अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डा0 आर. के. दीक्षित जी, एस.टी.एस. श्री अखिलेश श्रीवास्तव जी व टी.बी.एच.बी. श्री हमजा खान व स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के साथ ही साथ सभी टीबी पीड़ित मरीज एवं उनके परिजन उपस्थित थे।
*स्वामी मुक्तिनाथानन्द जी महाराज ने संबोधित करते हुए कहा कि* टीबी रोगियों के साथ किसी प्रकार का सामाजिक भेदभाव नहीं होना चाहिए। उन्होंने बताया कि आज भी टीबी रोगियों, विशेषकर महिलाओं एवं बच्चों, को सामाजिक भेदभाव का सामना करना पड़ता है। उन्हें अकेला छोड़ दिया जाता है, वहीं टीबी से पीड़ित बच्चों के साथ अन्य बच्चे न तो बैठते हैं और न ही खेलते हैं। यह स्थिति मरीजों के हित में नहीं है, क्योंकि इससे उनके मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है, जबकि उन्हें इस समय परिवार और समाज के सहयोग व हौसले की सबसे अधिक आवश्यकता होती है।
*उन्होंने जोर देते हुए सभी टीबी रोगियों को बताया कि* टीबी से पीड़ित प्रत्येक रोगी व उनके परिजनों को टीबी को छुपाना नहीं चाहिए, बल्कि बाहर निकलने पर रोगी एवं परिजनों को मास्क का उपयोग करना चाहिए। जहां तक संभव हो, भीड़-भाड़ से दूर रहना चाहिए। मरीज और परिजनों के बीच बातचीत में भी सावधानी बरतनी चाहिए। क्योंकि एक टीबी रोगी खांसने या छींकने से कम से कम 15 नए टीबी रोगी संक्रमित कर सकता है।
*उन्होंने बताया कि* यदि दो सप्ताह से अधिक खांसी, खांसी में बलगम आना, खांसी में खून आना, सीने में दर्द, सांस लेने या खांसते समय दर्द महसूस होना, सांस फूलना, लंबे समय तक बुखार रहना, रात में अत्यधिक पसीना आना, थकान और कमजोरी महसूस होना, लगातार भूख की कमी रहना तथा बिना किसी स्पष्ट कारण के वजन कम होना जैसी समस्याएं दिखाई दें, तो शीघ्र ही नजदीकी टीबी केंद्र, जिला अस्पताल या सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए।
सबसे अहम बात यह है कि सभी टीबी मरीजों को अपना उपचार पूर्ण करना चाहिए और दवा बीच में नहीं छोड़नी चाहिए, अन्यथा गंभीर स्थिति उत्पन्न होकर एमडीआर टीबी होने का खतरा बढ़ जाता है। इससे मरीज की स्थिति अधिक बिगड़ सकती है और समय पर उपचार न मिलने पर जीवन के लिए खतरा भी बढ़ जाता है।
*अन्त में स्वामी जी ने कहा कि* इस तरह के प्रयास भगवान श्री रामकृष्ण के सिद्वांत ‘‘नर सेवा नारायण सेवा’’ को सही मायने में चरितार्थ करता है इसके साथ ही उन्होंने टी0 बी0 रोगियों के शीघ्र लाभ हेतु श्री ठाकुर जी के श्री चरणों में कामना की।
