जननायक कर्पूरी ठाकुर के फार्मूले को केंद्र सरकार को लागू कर देना चाहिए था : पूर्व मंत्री अनीस मंसूरी

उत्तर प्रदेश राज्य लखनऊ शहर

लखनऊ, पसमांदा मुस्लिम समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष पूर्व मंत्री अनीस मंसूरी ने कहा कि जननायक कर्पूरी ठाकुर के फार्मूले को केंद्र सरकार को लागू कर देना चाहिए था जबकि 2014 से अबतक आप सत्ता में हैं, अब 2024 लोक सभा चुनाव में लाभ लेने के लिए भारत रत्न देने की घोषणा की है यदि केंद्र सरकार को लगता हैं कि सम्मान देने में देरी हुई हैं तो अब तत्काल प्रभाव से कर्पूरी ठाकुर फार्मूला को देश भर में लागू कर पिछड़ों, श्रमिकों, मज़दूरों, दलितों, पसमांदा समाज के वंचितों को आरक्षण का लाभ देगी तभी सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

अनीस मंसूरी ने कहा कि केंद्र सरकार का यह चुनावी स्टंट हैं वरना सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न देने से पहले उनका फार्मूला लागू कर देना चाहिए यदि भारत रत्न देने से पहले कर्पूरी ठाकुर फार्मूला लागू कर देती और उसके बाद सम्मान देने की घोषणा करते तो भाजपा की साफ गोई नजर आती ऐसा न करके भाजपा ने सिर्फ वोट साधने की राजनीति की हैं।

अनीस मंसूरी ने कहा कि उनकी जाति, समुदाय की जन संख्या 1.70 प्रतिशत हुआ करती थी वह सारी पिछड़ी जातियों को इकठ्ठा करने वाले पहले नेता थे, सियासत में पिछड़ी जातियों के लिये सीमित राजनैतिक स्थान था, मुख्यमंत्री काल में उन्होंने 1978 में बिहार में सरकारी सेवाओं में पिछड़ों को 26 प्रतिशत आरक्षण दिया था, एक सेक्युलर नेता के रूप में वह पहले ब्यक्ति थे जिन्होंने ने पिछड़े वर्गों में वंचितों को अलग से वर्गीस्कृत किया, कर्पूरी ठाकुर को इस महान कार्य के लिये हमेशा याद किया जायेगा।

अनीस मंसूरी ने कहा कि यदि केंद्र सरकार सच में पिछडो के उत्थान एवं सम्मान के लिये समर्पित है तो पूर्व के भांति जो 27 प्रतिशत आरक्षण की ब्यवस्था की गई थी उसमे आरक्षण के अतरिक्त जो जनरल कैटेगरी में मैरिट के आधार पर सेलेक्ट होते थे, वर्तमान सरकार में ओबीसी और एससी आरक्षण कोटे में सीमित कर दिया है यह ब्यवस्था ख़त्म होनी चाहिये।

अनीस मंसूरी ने कहा कि केंद्र व राज्य की सरकारों में जो पिछड़ी जाति के नेता जो बड़े पदों पर बैठे हैं उन्हे कर्पूरी ठाकुर फार्मूला पूरे देश में लागू कर ने के लिये आवाज़ क्यों नहीं उठाते? उन्हें लगता हैं कि यदि पिछड़ों के हित में आवाज उठाएंगे तो उनका राजनैतिक और ब्यक्तिगत हानि हो सकती हैं।

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