दुर्गुणों को जलाकर प्रेम के रंगों की मनाएं होली-मुक्तिनाथानन्द जी

उत्तर प्रदेश राज्य लखनऊ शहर

भगवान कृष्ण ने गोपियो के साथ रंग खेला व चैतन्य महाप्रभु ने इसी दिन प्रेम अवतार के रूप में जन्म लिया था। इस रंगो के साथ ही उमंग का त्योहार है। होली के दिन लोग एक दूसरे के साथ आनन्द का अनुभव करते हुए रंग लगाते हैं व आपसी प्रेम सद्भाव के साथ परस्पर खुशियां मनाते है।

*रामकृष्ण मठ निराला नगर, लखनऊ के अध्यक्ष स्वामी मुक्तिनाथानन्दजी महाराज ने बताया कि* होली रंग तथा उमंग का त्यौहार है। यह हमें परस्पर खुशियां मनाने व आपसी प्रेम सद्भाव की शिक्षा देती है। स्वामीजी ने बताया कि इस अवसर पर चैतन्य महाप्रभु की जयंती भी है जो कि प्रेम के अवतार थे। रामकृष्ण मठ में इस अवसर पर होली पूरे रंग उमंग, प्रेम व उत्साह से मनाई जाएगी। स्वामीजी ने कहा कि भारतीय संस्कृति की यह विशेषता है कि वह सबको परस्पर जोड़ते हुए प्रेम पूर्वक रहने की शिक्षा देती है।

होली का यह पावन पर्व हम सबको अपने पुराने भेदभाव को मिटाकर हर्ष व उल्लास पूर्वक होलिकोत्सव मनाने की सीख देती है। *आज सांय 7:30 बजे रामकृष्ण मठ में होलिका दहन किया गया* तथा मिष्ठान का वितरण किया गया। होलिका दहन के अवसर पर चर्चा करते हुए *स्वामी मुक्तिनाथानन्दजी ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को चाहिए कि वह अपने मद, अहंकार व दुर्गुणों को होलिका में दहन अर्थात जला दे, जिससे उसका जीवन निष्कपट, निष्कलंक व उज्जवल हो।*

स्वामी जी ने समस्त भक्तगणों, देश व समाज के उज्जवल भविष्य की मंगलमय कामना की।

 

 

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