नई दिल्ली : शेख हसीना के सत्ता से बाहर होने के बाद से ही बांग्लादेश के सुर बदले-बदले से नजर आ रहे हैं. मोहम्मद यूनुस की सरकार ‘एक तो चोरी और ऊपर से सीना जोरी’ के अपने एटीट्यूड से बाहर निकलने का नाम ही नहीं ले रही है. कभी वो भारत को आंखें दिखाते हैं. दूसरे ही पल दोस्ती की बात करने लगते हैं.
बीते करीब डेढ़ महीने में ऐसा एक बार नहीं बल्कि कई बार देखने को मिल चुका है. ताजा मामले में गृह मंत्री अमित शाह के बयान पर आपत्ति जताने के अगले ही दिन बांग्लादेश अब नदियों के पानी के मसले पर भारत के सामने भीख मांगता नजर आ रहा है.
गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में झारखंड की एक चुनावी रैली में प्रदेश से बांग्लादेशी घुसपैठियों को पकड़कर उल्टा टांगने की बात कही तो पड़ोसी देश में खलबली मच गई. एक तो बांग्लादेश अपने देश के लोगों को भारत में अवैध तरीके से घुसपैठ करने से रोक नहीं पा रहा. जब ये लोग भारत आकर भारतीयों के रोजगार के हक को मारते हैं, तब गृह मंत्री की कड़ी टिप्पणी में उन्हें बांग्लादेशी अस्मिता की याद आने लगती है. गृह मंत्री के बयान के बाद बांग्लादेश ने ढाका में भारतीय उच्चायुक्त को संपर्क कर आपत्ति दर्ज की.
पानी के बंटवारे के लिए मांग रहा मदद
बांग्लादेश की मोहम्मद यूनुस सरकार में जल संसाधन सलाहकार सईदा रिजवाना हसन ने बुधवार को कहा है कि बांग्लादेश जल्द ही भारत के साथ सीमा पार नदियों के जल बंटवारे पर बातचीत करने के लिए बातचीत करेगा. बुधवार को ‘वर्ल्ड रिवर डे’ के अवसर पर एक सेमिनार में बोलते हुए रिजवाना ने कहा कि बातचीत जनता की राय पर विचार करने के बाद की जाएगी और बातचीत के नतीजों को लोगों के साथ साझा किया जाएगा.
भारत से बारिश की सूचना भी चाहिए
बांग्लादेशी सरकार की सलाहकार ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय नदियों के जल बंटवारे का मुद्दा जटिल है, लेकिन आवश्यक सूचनाओं का आदान-प्रदान राजनीतिक नहीं होना चाहिए. उन्होंने कहा कि एक देश बारिश के आंकड़े और नदियों में संरचनाओं के स्थान की जानकारी चाह सकता है और आंकड़ों के आदान-प्रदान से जान-माल को होने वाले नुकसान को रोकने में मदद मिल सकती है. बारिश के आंकड़े शेयर करना एक मानवीय मुद्दा है. जीवन बचाने के लिए आवश्यक आंकड़े दिए जाने चाहिए. बांग्लादेश के दावे स्पष्ट और दृढ़ता से रखे जाएंगे.
