तुर्की के बाद चीन भूकंप के तेज झटके, रिक्टर स्केल पर 4.5 रही तीव्रता, जानमाल का नुकसान नहीं

उत्तर प्रदेश राज्य लखनऊ शहर

नई दिल्ली : चीन में शुक्रवार सुबह भूकंप के झटके महसूस किए गए. नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी ने अपने X हैंडल से एक पोस्ट करके बताया कि भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 4.5 मापी गई. भारतीय समयानुसार 16 मई की सुबह 6 बजकर 29 मिनट पर भूकंप के ये झटके महसूस किए गए, जिसकी गहराई 10 किलोमीटर थी. हालांकि, इसमें जान-माल के नुकसान की कोई खबर नहीं है. इससे पहले 12 मई को भी चीन में भूकंप के झटके महसूस किए गए थे.

दक्षिण-पश्चिम चीन के शिजांग ऑटोनॉमस रीजन के ल्हाजे काउंटी में 12 मई की सुबह 5:11 बजे 5.5 तीव्रता का भूकंप आया था. समाचार एजेंसी ने बताया कि इस भूकंप की वजह से जान-माल का कोई नुकसान नहीं हुआ और पानी, बिजली, सड़क और संचार सहित अन्य आवश्यक बुनियादी ढांचे को कोई नुकसान नहीं पहुंचा. चीन भूकंप नेटवर्क केंद्र (CENC) के हवाले से बताया कि भूकंप 10 किलोमीटर की गहराई पर आया, जिसका केंद्र 28.91 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 87.54 डिग्री पूर्वी देशांतर पर था.

इससे पहले तुर्की में भी कल 5.1 तीव्रता का भूकंप आया था. ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी मेहर के अनुसार, भूकंप का प्रभाव तुर्की की राजधानी अंकारा में भी महसूस किया गया. इस घटना में जान-माल का कोई नुकसान नहीं हुआ. यह घटना ग्रीस के फ्राई के निकट बुधवार सुबह आए 6.1 तीव्रता के भूकंप के बाद हुई. यूनाइटेड स्टेट्स जियोलॉजिकल सर्वे के अनुसार, भूकंप स्थानीय समयानुसार सुबह 1:51 बजे 78 किलोमीटर की गहराई पर आया था. भूकंप के झटके मिस्र के काहिरा से लेकर इजरायल, लेबनान और जॉर्डन तक महसूस किए गए. भूकंप के आकार को देखते हुए, जिसका केंद्र ग्रीस के दक्षिण-पूर्व में समुद्र में था, स्थानीय अधिकारियों ने एहतियात के तौर पर सुनामी की चेतावनी जारी की.

यह क्षेत्र अधिक तीव्रता के भूकंप के लिए जाना जाता है. तुर्की के आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, देश में हर साल कम से कम एक 5.0 तीव्रता का भूकंप आता है. इस साल की शुरुआत में, सेंटोरिनी द्वीप पर कई भूकंप आए, जिनमें से कई की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 5 से भी ज्यादा थी, लेकिन उस दौरान भी कोई बड़ी क्षति नहीं हुई. फरवरी 2023 में, तुर्की और सीरिया में शक्तिशाली भूकंप आए थे. पहला भूकंप 7.8 तीव्रता का था, उसके बाद दूसरा भूकंप 7.5 तीव्रता का था. इसके साथ ही कई शक्तिशाली झटके महसूस किए गए थे, जिससे इमारतें ढह गई थीं. विनाशकारी प्रभाव के कारण तुर्की में 59,000 और सीरिया में 8,000 लोगों की मौत हुई थी.

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