नई दिल्ली : ट्रेन टिकटों की ऑनलाइन बुकिंग में गड़बड़ाझाला रोकने के लिए रेलवे ने कई सख्त कदम उठाए हैं. रेलवे ने इस साल के शुरू से अब तक 3.02 करोड़ संदिग्ध यूजर आईडी बंद की है, तत्काल टिकट बुकिंग में एंटी बॉट सिस्टम लगाया है और 322 ट्रेनों में ऑनलाइन तत्काल टिकट के लिए ओटीपी वेरिफिकेशन अनिवार्य किया है. इस कदमों का असर भी दिखने लगा है. 96 लोकप्रिय ट्रेनों में से 95% में टत्काल टिकट मिलने का समय बढ़ गया है. यानी अब यात्रियों को पहले से ज्यादा आसानी से कन्फर्म तत्काल टिकट मिल पा रहे हैं.
रेलवे का दावा है कि इन कदमों के बाद टिकट बुकिंग प्रक्रिया पहले से अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और यात्री-हितैषी बन गई है. पहले जहां तत्काल विंडो खुलते ही टिकट चुटकियों में गायब हो जाते थे, अब ऐसा नहीं हो रहा है. तत्काल टिकट सीमित होते हैं और पीक सीजन में इनकी भारी मांग रहती है. अक्सर दलालों द्वारा अलग-अलग तरीकों से सिस्टम को चकमा देकर टिकट बुक करा लेने की शिकायतें आती रहती हैं. रेलवे ने इन शिकायतों को गंभीरता से लिया है और ट्रेन टिकटों की कालाबाजारी रोकने को पूरा जोर लगा रही है.
3.02 करोड़ आईडी की ब्लॉक
रेलवे ने जनवरी 2025 से अब तक 3.02 करोड़ संदिग्ध यूज़र आईडी बंद कर दी गई हैं ताकि टिकटों की ब्लैक मार्केटिंग रोकी जा सके. ये वही आईडी थीं जिनका इस्तेमाल ब्लैक मार्केटिंग और फर्जी बुकिंग में किया जाता था. तत्काल टिकट बुकिंग में रेलवे ने एंटी-बॉट सिस्टम लगा दिया है. इसका असर यह हुआ है कि अब मशीनें या दलालों द्वारा बनाए गए ऑटोमेटिक सिस्टम से टिकट बुक नहीं हो रही है. इससे आम यात्रियों को तत्काल टिकट मिलने में आसानी हुई है.
ओटीपी वेरिफिकेशन शुरू
322 ट्रेनों में तत्काल टिकट बुकिंग के दौरान आधार आधारित ओटीपी वेरिफिकेशन अनिवार्य कर दिया है. वहीं 211 ट्रेनों में यह सुविधा आरक्षण काउंटरों पर भी लागू कर दी गई है ताकि ऑफलाइन टिकटिंग भी उतनी ही सुरक्षित रहे. जब कोई यात्री तत्काल टिकट बुक करता है तो मोबाइल नंबर पर एक OTP आता है. टिकट तभी जारी होगा जब यात्री यह OTP दर्ज कर देगा. इससे फर्जी बुकिंग और दलालों की एंट्री काफी हद तक रुकी है क्योंकि हर बुकिंग सीधे एक मोबाइल नंबर से लिंक हो गई है.
