नई दिल्ली : मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के बीच तनाव अब और बढ़ गया है. ईरान के हमलों के बाद कतर ने बड़ा कदम उठाते हुए ईरान के सैन्य और सुरक्षा अधिकारियों को ‘परसोना नॉन ग्राटा’ घोषित कर दिया है और उन्हें 24 घंटे के भीतर देश छोड़ने का आदेश दिया है. कतर के विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह फैसला उसकी संप्रभुता पर बार-बार हुए हमलों और आक्रामक कार्रवाई के जवाब में लिया गया है. दोहा स्थित ईरानी दूतावास को आधिकारिक नोट देकर सैन्य अताशे, सुरक्षा अताशे और उनके स्टाफ को तुरंत देश छोड़ने को कहा गया है.
कतर की गैस फील्ड पर हुआ हमला
यह बड़ा कदम ऐसे समय आया है जब कतर के सबसे अहम ऊर्जा केंद्र रास लफान इंडस्ट्रियल सिटी पर मिसाइल हमला हुआ. यह वही जगह है जो कतर की अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाती है और दुनिया की LNG सप्लाई में बड़ी भूमिका निभाती है. कतर एनर्जी के मुताबिक हमले में भारी नुकसान हुआ, हालांकि राहत की बात यह रही कि कोई हताहत नहीं हुआ. फायर टीमों ने आग पर काबू पाने के लिए तुरंत ऑपरेशन शुरू किया.
सऊदी-कतर-UAE को चेतावनी
वहीं दूसरी तरफ ईरान ने सऊदी अरब, कतर और संयुक्त अरब अमीरात को सीधी चेतावनी दी है कि वे अपने प्रमुख पेट्रोकेमिकल और गैस ठिकानों को तुरंत खाली कर दें, क्योंकि आने वाले घंटों में इन पर हमले हो सकते हैं. ईरान के सरकारी मीडिया के जरिए जारी इस चेतावनी में कहा गया कि ये ऊर्जा केंद्र अब ‘वैध और सीधे टार्गेट’ बन चुके हैं’ ईरान ने साफ शब्दों में कहा कि इन ठिकानों पर जल्द ही हमला किया जाएगा, इसलिए वहां मौजूद नागरिकों, कर्मचारियों और स्टाफ को तुरंत सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए कहा गया है.
किन जगहों पर हो सकता है हमला?
निशाने पर जिन प्रमुख ठिकानों का जिक्र किया गया है, उनमें सऊदी अरब की सैमरेफ रिफाइनरी और जुबैल पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स, यूएई का अल होसन गैस फील्ड, और कतर के मेसाईद पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स तथा रास लफान रिफाइनरी शामिल हैं. ये सभी दुनिया के सबसे अहम तेल और गैस इंफ्रास्ट्रक्चर में गिने जाते है
यह चेतावनी ऐसे समय आई है जब कुछ ही समय पहले इजरायल ने ईरान के साउथ पार्स गैस फील्ड पर हमला किया गया था. यह दुनिया का सबसे बड़ा प्राकृतिक गैस भंडार माना जाता है और ईरान की ऊर्जा व्यवस्था की रीढ़ है. इजरायली अधिकारी ने भी इस हमले को अमेरिका की मंजूरी और समन्वय से किया गया बताया है.
UAE के गैस प्लांट पर गिरा मलबा
सऊदी अरब ने राजधानी रियाद के ऊपर कई बैलिस्टिक मिसाइलों को मार गिराने का दावा किया, जबकि कुछ ड्रोन भी इंटरसेप्ट किए गए. मलबा गिरने से कुछ लोग घायल हुए. उधर अबू धाबी में भी तेल और गैस सुविधाओं के पास मिसाइल के मलबे गिरने से संचालन अस्थायी रूप से प्रभावित हुआ, हालांकि वहां भी किसी के घायल होने की सूचना नहीं है.
ईरान ने पहले ही संकेत दे दिया था कि अगर उसके ऊर्जा ठिकानों पर हमले जारी रहे तो वह खाड़ी देशों के तेल और गैस इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाएगा. अब कतर पर हमले और उसके बाद उठाए गए कूटनीतिक कदमों ने पूरे क्षेत्र में तनाव को और बढ़ा दिया है. इस घटनाक्रम का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी दिखने लगा है. कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं और आपूर्ति को लेकर चिंता गहरा रही है.
