लखनऊ | 25 अक्टूबर 2026 ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) की उत्तर प्रदेश राज्य परिषद की बैठक लखनऊ में आयोजित की गई। बैठक में संगठन के राजनीतिक एवं सांगठनिक कार्यों की समीक्षा की गई तथा 28 से 30 नवंबर 2026 तक नागपुर में आयोजित होने वाले आइसा के 11वें राष्ट्रीय सम्मेलन की तैयारियों को आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई।

संगठन के विस्तार की योजना के तहत राज्य परिषद ने सुल्तानपुर, सीतापुर, आगरा, मऊ, अयोध्या, गोंडा, जौनपुर, अंबेडकर नगर, चंदौली, गाजीपुर, बलिया, मिर्जापुर, सोनभद्र, कौशांबी, रामपुर, अमेठी, शाहजहांपुर, कुशीनगर, सिद्धार्थनगर, देवरिया, मुरादाबाद और कन्नौज में नई संयोजन समितियों के गठन का निर्णय लिया। इसके साथ ही कानपुर, रायबरेली, लखीमपुर, प्रयागराज, वाराणसी, मेरठ, महराजगंज, बस्ती, आजमगढ़, अलीगढ़ और गोरखपुर में जिला सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे।

बैठक में देशभर में छात्र-युवा आंदोलनों में आइसा की बढ़ती भागीदारी का आकलन किया गया। विशेष रूप से यूजीसी विनियमों के समर्थन में चल रहे आंदोलन, परीक्षा में अनियमितताओं और नीट पेपर लीक के खिलाफ संघर्ष तथा मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और पात्र मतदाताओं के नाम काटे जाने के खिलाफ हुए विरोध-प्रदर्शनों पर चर्चा हुई। इन आंदोलनों ने शिक्षा तक समान पहुंच, सामाजिक न्याय, संस्थागत जवाबदेही और लोकतांत्रिक अधिकारों के सवालों को व्यापक सार्वजनिक बहस के केंद्र में लाया है। साथ ही, इन्होंने छात्र लामबंदी और संगठन के विस्तार के लिए नए अवसर भी पैदा किए हैं।

राज्य परिषद ने इन संघर्षों में आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष कॉमरेड नेहा की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। साथ ही, संगठन के सामूहिक नेतृत्व और कार्यकर्ताओं के योगदान को भी स्वीकार किया, जिन्होंने इन आंदोलनों में आइसा की सक्रिय भागीदारी को मजबूत किया है। बैठक में जोर दिया गया कि जन आंदोलनों से निर्मित राजनीतिक प्रभाव को निरंतर सांगठनिक गतिविधियों, नए छात्र नेतृत्व के विकास और ऐसी मजबूत लोकतांत्रिक संरचनाओं के माध्यम से स्थायी रूप दिया जाना चाहिए, जो शैक्षणिक संस्थानों में स्वतंत्र रूप से संघर्षों की पहल कर सकें।
बैठक को संबोधित करते हुए आइसा के राष्ट्रीय सचिव कॉमरेड प्रसेनजीत ने आगामी राष्ट्रीय सम्मेलन के राजनीतिक महत्व और छात्र आंदोलन के सामने मौजूद चुनौतियों पर अपनी बात रखी। उन्होंने हालिया संघर्षों के अनुभवों की आलोचनात्मक समीक्षा करने, संगठन की राजनीतिक एवं वैचारिक बुनियाद को मजबूत करने और भविष्य के आंदोलनों के लिए सामूहिक दिशा निर्धारित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
आइसा उत्तर प्रदेश के राज्य अध्यक्ष कॉमरेड मनीष कुमार ने छात्रों की बढ़ती भागीदारी को टिकाऊ सांगठनिक ढांचे में बदलने की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने जिला स्तर पर संगठन को मजबूत करने, नए कार्यकर्ताओं और नेतृत्व को विकसित करने तथा राष्ट्रीय सम्मेलन की तैयारियों में उत्तर प्रदेश के सभी हिस्सों से सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने की बात कही।

बलिया, कानपुर, सीतापुर और गोरखपुर में संयोजन समितियों के गठन का निर्णय उत्तर प्रदेश में आइसा की सांगठनिक उपस्थिति के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। प्रस्तावित जिला सम्मेलनों का उद्देश्य मजबूत स्थानीय सांगठनिक ढांचे का निर्माण करना, छात्रों को निरंतर राजनीतिक गतिविधियों से जोड़ना तथा शैक्षणिक संस्थानों और जिलों के विशिष्ट सवालों पर संघर्ष संगठित करने की क्षमता विकसित करना है।
राज्य परिषद की बैठक में शिक्षा के निजीकरण और व्यापारीकरण, बढ़ती फीस, छात्रवृत्ति से जुड़ी समस्याओं, बेरोजगारी तथा शैक्षणिक संस्थानों में लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमलों के खिलाफ छात्र लामबंदी तेज करने की आवश्यकता पर भी चर्चा हुई। बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि छात्रों की तात्कालिक समस्याओं को लेकर होने वाले संघर्षों को सुलभ एवं समानतापूर्ण शिक्षा, सामाजिक न्याय और लोकतांत्रिक स्वतंत्रताओं के व्यापक संघर्ष से जोड़ना आवश्यक है।
बैठक में स्पष्ट किया गया कि सांगठनिक विस्तार का आकलन केवल सदस्य संख्या बढ़ने या संगठन की भौगोलिक पहुंच विस्तृत होने से नहीं किया जा सकता। इसका वास्तविक महत्व राजनीतिक रूप से जागरूक छात्रों को विकसित करने, सामूहिक नेतृत्व को मजबूत करने और ऐसे संगठन का निर्माण करने में है, जो किसी एक अभियान तक सीमित न रहकर लंबे समय तक आंदोलनों को जारी रख सके। इसलिए हालिया संघर्षों के अनुभवों का योगदान केवल आइसा की व्यापक राजनीतिक उपस्थिति बढ़ाने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उन्हें संगठन की दीर्घकालिक मजबूती का आधार भी बनना चाहिए।
नागपुर में आयोजित होने वाला 11वां राष्ट्रीय सम्मेलन इन अनुभवों की सामूहिक समीक्षा करने, सांगठनिक प्रगति का आकलन करने और आने वाले समय के लिए आइसा की राजनीतिक एवं सांगठनिक प्राथमिकताएं निर्धारित करने का अवसर प्रदान करेगा।
उत्तर प्रदेश राज्य परिषद ने सम्मेलन की तैयारियों को तेज करने, नए जिला सांगठनिक ढांचे के गठन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने और पूरे प्रदेश में छात्र लामबंदी को मजबूत करने का संकल्प लिया। इसका उद्देश्य एक व्यापक, अधिक राजनीतिक रूप से जागरूक और संगठित छात्र आंदोलन का निर्माण करना है।
