नई दिल्ली में विपक्षी दलों के संगठन ‘इंडी’ (INDIA) गठबंधन के नेताओं ने चुनाव आयोग के खिलाफ जोरदार विरोध मार्च निकाला। प्रदर्शन के दौरान विपक्ष के शीर्ष नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को तुरंत पद से हटाने, मतपत्रों (बैलेट पेपर) से चुनाव कराने और मतदाता सूची से हटाए गए करोड़ों वोटरों के नाम दोबारा बहाल करने की मांग उठाई।
विपक्षी नेताओं के मुख्य बयान और मांगें
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पी. चिदंबरम (कांग्रेस): वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने फॉर्म-6 में बदलाव से जुड़े विवाद पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) ने स्पष्ट तौर पर कहा था कि अदालत ने फॉर्म-6 में किसी भी बदलाव को मंजूरी नहीं दी है, लेकिन इसके बावजूद गलत दावों के आधार पर भ्रम फैलाया जा रहा है।
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राजीव शुक्ला (कांग्रेस): कांग्रेस सांसद राजीव शुक्ला ने आरोप लगाया कि विशेष पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के नाम पर लगभग 13 करोड़ लोगों के साथ अन्याय हुआ है। उन्होंने कहा कि प्रभावित वोटरों के हक को बचाने के लिए मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाया जाना बेहद जरूरी है।
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अरविंद सावंत (शिवसेना-यूबीटी): शिवसेना (यूबीटी) सांसद अरविंद सावंत ने गठबंधन की प्रमुख मांगों को दोहराते हुए कहा कि निष्पक्ष चुनाव के लिए ईवीएम के बजाय बैलेट पेपर से चुनाव प्रक्रिया कराई जानी चाहिए और मतदाता सूची से हटाए गए वास्तविक नागरिकों के नाम तत्काल प्रभाव से वापस जोड़े जाने चाहिए।
विपक्षी दलों ने एकजुट होकर साफ किया कि लोकतंत्र और चुनावी पारदर्शिता की रक्षा के लिए उनका यह राष्ट्रव्यापी आंदोलन जारी रहेगा।
