शिकागो/नई दिल्ली: अमेरिका (मिल्वौकी) में आयोजित G20 व्यापार मंत्रियों की बैठक बिना किसी साझा या अंतिम आधिकारिक दस्तावेज (Final Consensus Document) के समाप्त हो गई। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने इसकी जानकारी देते हुए बताया कि कुछ सदस्य देशों के बीच नीतिगत मतभेदों के चलते आम सहमति नहीं बन पाई। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि मतभेदों के बावजूद देशों के बीच विभिन्न मुद्दों पर चर्चा काफी सार्थक और उपयोगी रही।
किन मुद्दों पर फंसा पेंच?
बैठक के दौरान वैश्विक व्यापार प्रणाली और औद्योगिक नीतियों को लेकर अलग-अलग देशों के विचार भिन्न रहे:
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जबरन मजदूरी (Forced Labour) और ट्रेड: वैश्विक सप्लाई चेन में जबरन श्रम से बने सामान पर प्रतिबंध लगाने को लेकर चर्चा हुई। भारत ने स्पष्ट किया कि किसी देश या क्षेत्र पर एकतरफा धारणा के बजाय केवल ठोस और सत्यापन योग्य सबूतों के आधार पर ही WTO नियमों के अनुरूप कार्रवाई होनी चाहिए।
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ओवरकैपेसिटी (अत्यधिक उत्पादन क्षमता): सरकारी सब्सिडी से संचालित ओवरकैपेसिटी और डंपिंग पर चिंता जताई गई। भारत ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि उसकी विनिर्माण क्षमता घरेलू मांग और वैश्विक जरूरतों पर आधारित है।
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WTO और MFN सिद्धांत: भारत ने विश्व व्यापार संगठन (WTO) के नियमों और मोस्ट-फेवर्ड-नेशन (MFN) सिद्धांत को निष्पक्ष व्यापार का आधार बताते हुए इसके संरक्षण की वकालत की।
भोजन को हथियार बनाने के खिलाफ बनी सहमति
व्यापक व्यापारिक मुद्दों पर आम सहमति न बन पाने के बावजूद, एक महत्वपूर्ण बिंदु पर सभी सदस्य देश एकजुट दिखे। G20 व्यापार मंत्रियों ने खाद्य व्यापार को भू-राजनीतिक दबाव या हथियार के रूप में इस्तेमाल न करने को लेकर एक अलग साझा बयान पर सहमति व्यक्त की।
अमेरिकी कारोबारियों और प्रवासी भारतीयों से संवाद
मिल्वौकी में बैठक समाप्त करने के बाद पीयूष गोयल शिकागो पहुंचे, जहां उन्होंने भारतीय-अमेरिकी समुदाय और प्रमुख अमेरिकी निवेशकों के साथ बैठकें कीं। उन्होंने अमेरिकी कंपनियों को भारत के बढ़ते आर्थिक क्षेत्र में निवेश करने और साझेदार बनने के लिए आमंत्रित किया।
