लखनऊ। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती की पूर्व संध्या पर प्रेस क्लब लखनऊ में जश्न ए आजादी फाउंडेशन के तत्वावधान में भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में सेमिनार, सम्मान समारोह तथा कवि सम्मेलन-मुशायरे का आयोजन हुआ। कार्यक्रम में वक्ताओं ने महात्मा गांधी के व्यक्तित्व, उनके विचारों, सत्य, अहिंसा, सामाजिक समरसता और समाजवाद की अवधारणा पर गंभीरता से प्रकाश डाला।कार्यक्रम में “गांधी जी और समाजवाद” विषय पर आयोजित सेमिनार में प्रमुख वक्ता देवेंद्र पाल वर्मा ने कहा कि गांधी जी के समाजवाद और आज के समाजवाद में काफी अंतर है। गांधी जी का समाजवाद केवल राजनीतिक व्यवस्था का विचार नहीं था, बल्कि वह सामाजिक समानता, आर्थिक न्याय, नैतिकता और अंतिम व्यक्ति तक विकास का रास्ता दिखाता था। उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता है कि गांधी जी के समाजवादी विचारों को नई पीढ़ी और आम जनमानस से जोड़ा जाए।इस अवसर पर प्रमुख वक्ता सलाउद्दीन शिबू एडवोकेट ने कहा कि गांधी जी के समाजवाद का मूल उद्देश्य रामराज्य की स्थापना की अवधारणा से जुड़ा था। उनके लिए रामराज्य किसी धार्मिक राज्य का नाम नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्था का प्रतीक था जिसमें न्याय, समानता, नैतिकता और कमजोर व्यक्ति के अधिकारों की रक्षा हो।कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद सिराज मेंहदी ने कहा कि महात्मा गांधी केवल भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के नेता नहीं थे, बल्कि उनका व्यक्तित्व पूरी मानवता के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने सत्य और अहिंसा को संघर्ष का हथियार बनाकर यह दिखाया कि नैतिक शक्ति के सामने बड़ी से बड़ी सत्ता को भी चुनौती दी जा सकती है। गांधी जी के पदचिह्नों पर चलकर हम पूरी दुनिया में राज कर सकते हैं—यह राज सत्ता का नहीं, बल्कि प्रेम, शांति, सत्य और मानवता का राज होगा।कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि रोहित अग्रवाल ने कहा कि आज के समय में महात्मा गांधी जी की सबसे ज्यादा जरूरत है। समाज में बढ़ती असहिष्णुता, तनाव और विभाजन के बीच गांधी जी के सत्य, अहिंसा, संवाद और आपसी सद्भाव के विचार पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हैं। उन्होंने कहा कि गांधी जी का जीवन हमें यह संदेश देता है कि सामाजिक बदलाव केवल नारों से नहीं, बल्कि व्यक्तिगत आचरण और नैतिक प्रतिबद्धता से संभव है।महात्मा गांधी का व्यक्तित्व भारतीय इतिहास में इसलिए विशिष्ट है क्योंकि उन्होंने स्वतंत्रता के संघर्ष को केवल राजनीतिक आंदोलन तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने सत्याग्रह, अहिंसा, स्वदेशी, आत्मनिर्भरता, ग्राम स्वराज, सामाजिक समरसता और कमजोर वर्गों के सम्मान को अपने सार्वजनिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया। उनका मानना था कि किसी भी समाज की वास्तविक प्रगति का आकलन इस बात से होना चाहिए कि उसमें सबसे कमजोर और वंचित व्यक्ति को कितना सम्मान, अधिकार और अवसर प्राप्त है।गांधी जी का जीवन स्वयं उनके विचारों का उदाहरण था। उन्होंने साधारण जीवन, आत्मअनुशासन और नैतिक साहस को राजनीतिक संघर्ष से जोड़ा। उनके लिए साधन और साध्य दोनों की शुचिता महत्वपूर्ण थी। यही कारण है कि गांधी का प्रभाव भारत की सीमाओं से आगे बढ़कर विश्व के अनेक सामाजिक और नागरिक अधिकार आंदोलनों तक पहुंचा।कार्यक्रम में मुख्य अतिथि सिराज मेंहदी तथा रोहित अग्रवाल ने सेमिनार के प्रमुख वक्ताओं देवेंद्र पाल वर्मा एवं सलाउद्दीन शिबू एडवोकेट को “गांधी शांति सम्मान 2026” से सम्मानित किया गया।इसके बाद आयोजित कवि सम्मेलन एवं मुशायरे ने कार्यक्रम में साहित्यिक रंग भर दिया। मोहम्मद अली साहिल,शाहबाज तालिब, अभीश्रेष्ठ तिवारी और आदर्श गुलसिया ने अपनी रचनाओं से उपस्थित दर्शकों का मन मोह लिया। कवियों और शायरों की प्रस्तुतियों को श्रोताओं ने सराहा।कार्यक्रम में आए सभी मेहमानों का स्वागत मुर्तजा अली अब्दुल वहीद तथा वामिक खान ने किया।इस अवसर पर इंसराम अली, पी.सी. कुरील, मुर्तजा अली, वामिक खान, अब्दुल वहीद, कुदरत उल्ला खान,मोहम्मद अली साहिल, आमिर मुख़्तार, शहाब खान, आरिफ मुकीम, मोहम्मद सैफ़,मोहम्मद सूफियान, तौसीफ़ हुसैन, मोहम्मद सिराज बाबा,परवेज़ अख़्तर आदि मौजूद थे।कार्यक्रम का मूल संदेश यही रहा कि गांधी जी को केवल इतिहास के एक अध्याय के रूप में याद करने के बजाय उनके सत्य, अहिंसा, सामाजिक न्याय, सद्भाव और मानवता के विचारों को वर्तमान जीवन में उतारना ही उनके प्रति वास्तविक श्रद्धांजलि होगी।
