संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के सत्र के दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने वैश्विक व्यवस्था में आ रहे बदलावों पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि वर्ष 1945 के बाद से बनी पुरानी वैश्विक व्यवस्था अब नई वास्तविकताओं को जगह दे रही है और पूरी दुनिया तेजी से एक बहुध्रुवीय (Multipolar) व्यवस्था की ओर आगे बढ़ रही है।
भाषण की प्रमुख बातें:
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बदलाव की प्रक्रिया चुनौतीपूर्ण: जयशंकर ने स्पष्ट किया कि बहुध्रुवीय दुनिया की ओर यह समायोजन, स्वीकार्यता और तालमेल की प्रक्रिया आसान नहीं होगी। दुनिया में आज दिख रही ज्यादातर उथल-पुथल इसी बदलाव के दौर का नतीजा है।
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लोकतांत्रिक भविष्य को रोका नहीं जा सकता: विदेश मंत्री ने कहा कि दुनिया के लोकतांत्रिक भविष्य की ओर बढ़ने वाले कदम को कोई शक्ति नहीं रोक सकती। इसके लिए अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में सुधार (Reformed Multilateralism) की सख्त जरूरत है।
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ग्लोबल साउथ की भूमिका: भू-राजनीतिक तनावों, आर्थिक अनिश्चितताओं और जलवायु परिवर्तन के इस दौर में भी ‘ग्लोबल साउथ’ (विकासशील और उभरते देशों) की आवाज दुनिया के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बनी रहेगी।
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सतत विकास (SDGs) पर भारत का मॉडल: उन्होंने भारत का उदाहरण देते हुए कहा कि जब स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल, बिजली, सड़क और आवास जैसी बुनियादी सुविधाएं जमीनी स्तर पर पहुंचती हैं, तभी वैश्विक स्तर पर सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को सही मायने में हासिल किया जा सकता है।
