नई दिल्ली/वाशिंगटन: अमेरिका द्वारा पेटेंट दवाओं पर 100% आयात शुल्क (टैरिफ) लगाने की तैयारियों के बीच भारतीय फार्मास्यूटिकल सेक्टर के लिए राहत भरी खबर आई है। अमेरिकी वाणिज्य विभाग (US Commerce Department) ने योग्य देशों की सूची जारी की है, जिसमें भारत को कुछ चुनिंदा स्पेशलिटी दवाओं (Speciality Medicines) और उनके एक्टिव फार्मास्यूटिकल इंग्रीडिएंट्स (API / कच्चे माल) पर जीरो टैरिफ (0% Tariff) की छूट दी गई है।
क्यों अहम है यह फैसला?
अमेरिकी सरकार आयातित पेटेंट दवाओं और उनके सॉल्ट पर 100 प्रतिशत तक का भारी टैरिफ लागू करने जा रही है। ऐसे समय में भारत को मिली यह छूट भारतीय फार्मा निर्यातकों के लिए बेहद फायदेमंद मानी जा रही है।
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किन्हें मिली छूट: यह छूट भारत की कुछ विशिष्ट पेटेंट दवाओं, जीवन रक्षक स्पेशलिटी ड्रग्स और दवा बनाने में इस्तेमाल होने वाले एपीआई (API) पर लागू होगी।
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किन्हें नहीं मिलेगी राहत: यह छूट भारत से निर्यात होने वाली हर तरह की दवा पर लागू नहीं होगी, बल्कि केवल वाणिज्य विभाग द्वारा तय की गई निर्दिष्ट श्रेणी की दवाओं तक ही सीमित रहेगी।
भारतीय अर्थव्यवस्था और फार्मा क्षेत्र पर असर
| पहलू | विवरण |
| अमेरिका को निर्यात | भारत के कुल दवा निर्यात का लगभग 34% (एक-तिहाई) हिस्सा अकेले अमेरिकी बाजार में जाता है। |
| राहत की वजह | अमेरिका में भारतीय जेनेरिक और स्पेशलिटी दवाओं की भारी खपत और कम कीमत के कारण यह छूट जरूरी मानी जा रही थी। |
| बाजार की प्रतिक्रिया | इस छूट से भारतीय फार्मा कंपनियों (जैसे डॉ. रेड्डीज, सिप्ला, सन फार्मा) को अमेरिकी बाजार में अपने उत्पाद प्रतिस्पर्धी दामों पर बेचने में मदद मिलेगी। |
विशेषज्ञों के अनुसार, यह कदम अमेरिका में आवश्यक दवाओं की किल्लत रोकने और भारतीय दवा कंपनियों को अमेरिकी व्यापार नीति के नए बदलावों के बीच राहत देने के उद्देश्य से उठाया गया है।
