फिलिस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास को अमेरिका ने फिर नहीं दिया वीजा: भारत ने वीडियो संबोधन के प्रस्ताव का किया समर्थन

विदेश

संयुक्त राष्ट्र (न्यूयॉर्क): संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) की उच्चस्तरीय बैठक में शामिल होने के लिए न्यूयॉर्क आ रहे फिलिस्तीन के राष्ट्रपति महमूद अब्बास को अमेरिका ने एक बार फिर प्रवेश वीजा देने से इनकार कर दिया है। इसके जवाब में संयुक्त राष्ट्र महासभा में फिलिस्तीनी राष्ट्रपति को वीडियो लिंक के जरिए संबोधित करने की अनुमति देने वाला एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पास किया गया, जिसका भारत ने खुलकर समर्थन किया है।

152 देशों का मिला भारी समर्थन
अमेरिका द्वारा वीजा निरस्त किए जाने के बाद महासभा में ‘पार्टिसिपेशन बाई द स्टेट ऑफ फिलिस्तीन’ नाम से एक प्रस्ताव पेश किया गया। 193 सदस्यीय संयुक्त राष्ट्र महासभा में

समर्थन में मतदान: भारत, रूस, चीन और अधिकांश यूरोपीय देशों सहित 152 देशों ने प्रस्ताव के पक्ष में वोट दिया।

विरोध में मतदान: अमेरिका, इजराइल और पराग्वे सहित केवल 3 देशों ने इस प्रस्ताव के खिलाफ मतदान किया, जबकि 4 देश तटस्थ रहे।

भारत का स्पष्ट रुख
भारत ने फिलिस्तीन के पक्ष में वोट देकर एक बार फिर ‘टू-स्टेट सॉल्यूशन’ और फिलिस्तीन के अधिकारिक प्रतिनिधित्व के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। भारत 1988 से ही फिलिस्तीन को एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता देने वाले शुरुआती देशों में शामिल रहा है।

अमेरिका के रुख पर उठे सवाल
अमेरिकी विदेश विभाग ने राष्ट्रीय सुरक्षा और आतंकवाद निरोधी कानूनों (धारा 212(a)(3)(B)) का हवाला देते हुए फिलिस्तीनी प्राधिकरण (PA) और पीएलओ (PLO) के कई अधिकारियों के वीजा रोके हैं। अमेरिका का आरोप है कि इन संगठनों ने शांति वार्ताओं के वादों का पालन नहीं किया। हालांकि, संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय समझौते के तहत मेजबान देश होने के नाते अमेरिका पर सभी वैश्विक नेताओं को बैठक में भाग लेने की अनुमति देने की कानूनी जिम्मेदारी होती है, जिसे लेकर रूस और चीन ने अमेरिका की आलोचना की है।

वीडियो लिंक से देंगे संबोधन
इस प्रस्ताव के पास होने के बाद राष्ट्रपति महमूद अब्बास अब संयुक्त राष्ट्र महासभा के हॉल में पहले से रिकॉर्ड किए गए वीडियो संदेश या लाइव वीडियो लिंक के जरिए दुनिया भर के नेताओं को संबोधित कर सकेंगे।

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