दादा मियां के उर्स में समाजसेवियों व पत्रकारों ने पेश की अकीदत की चादर मुल्क में अमन-ओ-सलामती, भाईचारे और उत्तर प्रदेश की खुशहाली के लिए हुई ख़ुसूसी इज्तिमाई दुआ

एजुकेशन

लखनऊ। राजधानी लखनऊ के माल एवेन्यू स्थित सरकार हज़रत मोहम्मद अली शाह दादा मियां रहमतुल्लाह अलैह के मुबारक उर्स की रूहानी फ़िज़ाएं इन दिनों इबादत, मोहब्बत और अकीदत की ख़ुशबू से महक रही हैं। सदियों पुरानी सूफ़ी परंपरा और गंगा-जमुनी तहज़ीब की इस अज़ीम दरगाह पर देशभर से ज़ायरीन और अकीदतमंद बड़ी तादाद में हाज़िरी देकर अपनी मुरीदाना अकीदत का इज़हार कर रहे हैं।इसी रूहानी मौके पर उत्तर प्रदेश जिला मान्यता प्राप्त पत्रकार एसोसिएशन तथा समाजसेवियों की ओर से सरकार दादा मियां की बारगाह में पूरी अकीदत व एहतराम के साथ चादर पेश की गई। इस अवसर पर राज्य मुख्यालय से मान्यता प्राप्त स्वतंत्र पत्रकार डी.पी. शुक्ला विशेष रूप से मौजूद रहे।दरगाह के सज्जादा नशीन व मुतवल्ली हज़रत ख़्वाजा शबाहत हसन शाह की सरपरस्ती में ख़ुसूसी इज्तिमाई दुआ का एहतमाम किया गया। दुआ में अल्लाह तआला की बारगाह में मुल्क की तरक्की, अमन-ओ-अमान, आपसी भाईचारे, मोहब्बत, सुख-शांति और उत्तर प्रदेश की खुशहाली के लिए हाथ उठाए गए। साथ ही नेपाल में आई भीषण बाढ़ में जान गंवाने वाले मरहूमीन की मग़फ़िरत, उनके बुलंद दर्जात और उनके परिजनों को सब्र-ए-जमील अता फरमाने की इल्तिज़ा की गई।मजार-ए-अक़्दस पर समाज के सभी वर्गों, पत्रकार बिरादरी और उनके परिवारों की सेहत, बरकत, रोज़ी में इज़ाफ़ा, कामयाबी और हर तरह की आफ़त व मुसीबत से हिफ़ाज़त की भी दुआएं मांगी गईं। इस रूहानी महफ़िल में मौजूद अकीदतमंदों ने अश्कबार आंखों और दुआगो हाथों के साथ ख़ुदा की बारगाह में अपनी-अपनी मुरादें पेश कीं।

इस अवसर पर उत्तर प्रदेश जिला मान्यता प्राप्त पत्रकार एसोसिएशन के चेयरमैन अज़ीज़ सिद्दीकी, अध्यक्ष जुबैर अहमद और महामंत्री अब्दुल वहीद ने अपने संयुक्त बयान में कहा कि सरकार हज़रत दादा मियां रहमतुल्लाह अलैह की दरगाह सदियों से मोहब्बत, इंसानियत, भाईचारे और गंगा-जमुनी तहज़ीब का रौशन मीनार रही है। यहां से हमेशा सूफ़ी बुज़ुर्गों की वही तालीम आम हुई है, जो इंसानों को एक-दूसरे से मोहब्बत करना, नफ़रत को मिटाना और अमन का पैग़ाम देना सिखाती है।उन्होंने कहा कि आज जब दुनिया को इत्तेहाद, हमदर्दी और इंसानियत की सबसे ज़्यादा ज़रूरत है, ऐसे रूहानी आयोजन दिलों को जोड़ने, समाज में सौहार्द बढ़ाने और इंसानियत की शम्अ रोशन रखने का ज़रिया बनते हैं। उन्होंने दुआ की कि अल्लाह तआला मुल्क को अमन-ओ-सलामती, तरक्की और खुशहाली से नवाज़े तथा हर घर में बरकत और राहत अता फरमाए।इस पावन अवसर पर उत्तर प्रदेश जिला मान्यता प्राप्त पत्रकार एसोसिएशन के चेयरमैन अज़ीज़ सिद्दीकी, अध्यक्ष जुबैर अहमद, महामंत्री अब्दुल वहीद, सचिव तौसीफ हुसैन, वामिक खान, परवेज़ अख़्तर, मुर्तुजा अली, मोहम्मद अली साहिल, इमरान खान, आमिर मुख़्तार, कुदरत उल्ला खान, जसबीर गांधी, आरिफ मुकीम, शादाब कुरैशी, आफाक अहमद, मोहम्मद सलमान, दानिश हसन खान, सौरभ श्रीवास्तव, अमरजीत, वसी अहमद सिद्दीकी, तनवीर अहमद, बॉलीवुड छायाकार शिवम सिंह, डॉ. मुहम्मद आदिल, डॉ. खतीबुर्रहमान वारसी, इरशाद आरफी, हसन वारिस वारसी, हुसैन वारिस वारसी, मो. कैफ सहित बड़ी संख्या में गणमान्य लोग मौजूद रहे।चादर पेश करने के उपरांत दरगाह के सज्जादा नशीन हज़रत ख़्वाजा शबाहत हसन शाह ने बताया कि सरकार दादा मियां रहमतुल्लाह अलैह के मुबारक उर्स में उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश के विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में अकीदतमंद और ज़ायरीन हाज़िर होकर फ़ैज़ हासिल करते हैं। रातभर सजने वाली सूफ़ियाना कव्वालियों की महफ़िलें इश्क़-ए-इलाही, हुज़ूर अक़्दस सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की मोहब्बत और औलिया-ए-किराम की तालीमात का पैग़ाम आम करती हैं। वहीं दरगाह शरीफ़ में आने वाले हर ज़ायरीन के लिए बिना किसी भेदभाव के लगातार लंगर-ए-आम का एहतमाम किया जाता है, जो इस मुबारक उर्स की सबसे ख़ूबसूरत और बरकत वाली रिवायतों में शुमार है।रात ढलने के साथ दरगाह की रौशन फ़िज़ाओं में जब कव्वालों की बुलंद आवाज़ों में हम्द, नअत और मनक़बत गूंजने लगीं तो पूरा माहौल ज़िक्र-ओ-अज़कार, इश्क़-ए-इलाही और रूहानी कैफ़ियत में डूब गया। अकीदतमंदों ने इसे सरकार दादा मियां रहमतुल्लाह अलैह की बारगाह से मिलने वाली रूहानी बरकत का अनमोल एहसास बताया और देर रात तक इबादत, दुआ और अकीदत का सिलसिला जारी रहा।

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